तुम आज भी याद आते हो
।।तुम आज भी याद आते हो जब भी सुबह सुबह बच्चों को कच्ची नीद से जगाया जाता है जबरजस्ती से ही उनको नहलाया जाता है फिर ढेर सारा तेल चुपड़कर उनके बाल चिपकाया जाता है फिर स्कूल वाली आसमानी नीली ड्रेस में उन्हें स्कूल पहुचाया जाता है,तब ए बचपन तुम याद आते हो जब बच्चों को प्रार्थना की लाइन में लगते देखता हूं उस लाइन में एक दूसरे की पैंट खीचते देखता हूं टीचर से शरारत पकड़े जाने पर उनका सहम जाना देखता हूं फिर टीचर द्वारा पिटाई से बच जाने पर आंखों आंखों में मुस्कुराना देखता हूं,तब ए बचपन तुम याद आते हो जब होमवर्क की कॉपी भूलकर मासूम बहाने बनाना देखता हूं सवाल का जबाब न याद आने पर दोस्त का बगल से सही जबाब फुसफुसाना देखता हूं हल्की हल्की बातो पर एक दूसरे से रुठ जाना -मान जाना देखता हूं जब बच्चों को टिफिन से चोरी चोरी क्लास के बीच मे ही खाते देखता हूं जब उनको अपने दोस्त के टिफिन से शरारत में ही खाना निकालते देखता हूं एक दोस्त के पैसे से खरीदी नीली पीली टाफियां खरीदकर सबको बाटकर खाते देखता हू,तब ए बचपन तुम याद आते हो छुट्टी वाली घंटी की तरफ शाम को बेसब्री से देखना देखता हूं घंट...