मोदी जी पिछले वादों पर क्यो नही लड़ रहे है?
भारत ने 2014 में प्रचंड बहुमत देकर BJP को जिताया था और एक मजबूत सरकार इस विश्वास से बनाया था कि नई सरकार पुरानी सरकारों में जो कमियां थी उसे दूर करके देश को नई दिशा और दशा प्रदान करेगी । वर्तमान सत्तासीन पार्टी अपने 2014 के वादों पर कितना खरा उतरी उसका आकलन जनता को करना है और उसी पर वोट भी करना है वर्तमान में चुनाव चल रहे है और नेताओं के भाषण भी पूरे जोश में हो रहे है
इन सब के बीच सबसे ज्यादा जो आशा थी लोगो को की अबकी बार चुनाव का पैटर्न बदलेगा और चुनाव पुराने स्वरूप से नए स्वरूप में होगा ।ऐसी आशा करना लाजमी भी है क्योंकि बहुमत देने के बाद ऐसा सोच जा सकता है, उससे भी ज्यादा इसलिए भी जरूरी था कि मोदी जी 2014 मे बदलाव के नाम पर ही वोट मांगे थे ,उस समय जनता त्रस्त थी तो उन्हें मोदी जी मे एक आशा की किरण दिखी की कुछ तो नया होगा
लेकिन अगर वर्तमान में मोदी जी के भाषणों पर ध्यान दे तो हम क्या पाते है यही की जो मुद्दे भुनाकर मोदी जी सत्ता में आये थे उनको वो लगभग पूरी तरह से भूल से गये है जबकि अब तो समय था कि वो यह बताये की जो सरकार में आने के बाद से लगातार जिन योजनाओ का उन्होंने शिलान्यास पर शिलान्यास किया वो जमीन पर कितना उतरी उनका जनता को कितना लाभ मिला और भविष्य में क्या कुछ और करने वाले है । जो जो वादे उन्होंने 2014 के चुनाव में किये उस पर कितना काम हुआ
लेकिन इन सब मे से किसी पर मोदी जी बात ही नही कर रहे है । 2014 में तो कुछ विजन भी था लेकिन अबकी बार तो एकदम वही विपक्ष को निशाने पर लेना,सेना के नाम पर वोट मांगना, पाकिस्तान के नाम पर वोट मांग रहे है ,इन पर ध्यान दे तो यही पता चलता है कि जो नेता इस दुनिया मे नही है वो भी इनके लिए परेशानी है जो है वो तो है ही ,आखिर मोदी जी जनता के वादों और अपेक्षाओं पर क्यो बात नही कर रहे है ,क्या उन्होंने कुछ किया नही है या वो लोगो को फालतू के भावनाओ में फसाकर वोट लेना चाहते है
कारण जो भी हो लेकिन अबकी के उनके भाषणों में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे बहुत ही कम स्थान प्राप्त कर रहे है
इन सब के बीच सबसे ज्यादा जो आशा थी लोगो को की अबकी बार चुनाव का पैटर्न बदलेगा और चुनाव पुराने स्वरूप से नए स्वरूप में होगा ।ऐसी आशा करना लाजमी भी है क्योंकि बहुमत देने के बाद ऐसा सोच जा सकता है, उससे भी ज्यादा इसलिए भी जरूरी था कि मोदी जी 2014 मे बदलाव के नाम पर ही वोट मांगे थे ,उस समय जनता त्रस्त थी तो उन्हें मोदी जी मे एक आशा की किरण दिखी की कुछ तो नया होगा
लेकिन अगर वर्तमान में मोदी जी के भाषणों पर ध्यान दे तो हम क्या पाते है यही की जो मुद्दे भुनाकर मोदी जी सत्ता में आये थे उनको वो लगभग पूरी तरह से भूल से गये है जबकि अब तो समय था कि वो यह बताये की जो सरकार में आने के बाद से लगातार जिन योजनाओ का उन्होंने शिलान्यास पर शिलान्यास किया वो जमीन पर कितना उतरी उनका जनता को कितना लाभ मिला और भविष्य में क्या कुछ और करने वाले है । जो जो वादे उन्होंने 2014 के चुनाव में किये उस पर कितना काम हुआ
लेकिन इन सब मे से किसी पर मोदी जी बात ही नही कर रहे है । 2014 में तो कुछ विजन भी था लेकिन अबकी बार तो एकदम वही विपक्ष को निशाने पर लेना,सेना के नाम पर वोट मांगना, पाकिस्तान के नाम पर वोट मांग रहे है ,इन पर ध्यान दे तो यही पता चलता है कि जो नेता इस दुनिया मे नही है वो भी इनके लिए परेशानी है जो है वो तो है ही ,आखिर मोदी जी जनता के वादों और अपेक्षाओं पर क्यो बात नही कर रहे है ,क्या उन्होंने कुछ किया नही है या वो लोगो को फालतू के भावनाओ में फसाकर वोट लेना चाहते है
कारण जो भी हो लेकिन अबकी के उनके भाषणों में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे बहुत ही कम स्थान प्राप्त कर रहे है

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