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स्वास्थ्य और शिक्षा तक सबकी पहुच आखिर कब?

                        देश में आजकल एक दौर चल रहा है शिक्षा को लेकर जहां एक तरफ हर सरकारी संस्थाओं का नीजीकरण के तरफ सरकार अपना कदम बढ़ा रही है वही शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरत को भी सरकार किसी न किसी रुप में लोगों की पहुच से दूर करने की लगातार कोशिश कर ही रही है               अपने देश में आज भी एक बड़ी जनसंख्या रहती है जिनकी आमदनी इतनी ही है कि वो बस दो जून की रोटी का जुगाड़ कर लेते है या कभी कभी ऐसा होता है कि वो भी नसीब नही होता है उनके लिए बस कमाना खाना ही एकमात्र जरिया होता है जीना है तो कमाना है यदि काम करेगें तभी दो जून की रोटी का जुगाड़ होगा तो ऐसी स्थिति में उन जैसे परिवारो के बच्चो के लिए शिक्षा जैसी चीजे किसी सपने से कम नही होती है उनके दिमाग मे शिक्षा को लेकर कुछ होता ही नही ऐसे परिवार में अगर कोई बच्चा पैदा होता है तो यदि वह पढना चाहे तो कैसे पढ़ेगा यदि सरकारी संस्थाओं की फीस भी प्राईवेट संस्थाओं की तरह आसमान पर पहुचने लगेगी तो               वै...

प्रयास से कमी का पता भी चलता है

      प्रयास हमें हमारी कमियों से भी रूबरू कराती है यह पता मुझे भी आज एक बहुत ही छोटी सी घटना से हुयी तो मुझे लगा कि आप लोगों से बात करनी चाहिए तो लिख दिया है तो बात यह है कि मेरी हिन्दी की टाईपिंग की गति बहुत ही धीमी और त्रुटिपूर्ण थी जो कि मै लगातार कोशिश के बावजूद इस कमी से उबर नही पा रहा था लेकिन करे भी तो क्या करे बस लगातार यह खोज रहा था कि क्या कमी है कि मुझे वह कमी मिल नही रही है बस विश्वास इतना था कि आज नही तो कल मै इसमें कामयाब जरूर हो जाउगा क्योकी बचपन से यह सुनते आया हू कि अगर मेहनत अनवरत है तो कमी धीरे धीरे ही सही गायब जरूर हो जाती है     तो आज की घटना से आपको रूबरू कराता हू कि मै आज जब मैं टाईपिंग करनी शुरू की तब तो मेरा मन बहुत ही ज्यादा शांत था जिसके फलस्वरूप मेरी गति बहुत ही सही हो रही थी साथ ही साथ होने वाली त्रुटि में भी बहुत ही ज्यादा सुधार था       पहले और आज के प्रयास में बस इतना अंतर था कि आज जब मैं टाईपिंग कर रहा था तब मै बहुत ही शांत दिमाग से कर रहा था अन्य दिन में जब मैं टाईपिंग करता था तो उंगलियां बाद में चलती थी और ...

लोकतंत्र में सवालों के गोल-मोल जबाव

                     विश्व का सबसे बड़े लोकतंत्र का दावा करते है हम और हमारी सरकारे, पर जब बात वाजिब सवालों का आता है तो क्या हम वो सब हक पाते है जो वास्तव में एक लोकतांत्रिक शासन या देश के लोगो को वाकई मिलना चाहिए । यह एक सोचने वाली बात है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में देश के हक में क्या हो रहा है उसमें जनता को ही बाहर का रास्ता दिखला दिया जा रहा है उसे बस आर्डर के माध्यम से पता चल जाता है कि सरकार यानी की जो बस कुछ लोगो में रह कर जीवन जी रही है उसने आपके लिए कुछ नियम या सौदा कर लिया है आपको कल से उसे मानना है आप चाह कर या तो चुप रहे या चिल्ला ही ले कौन आपकी बात  को सुनने को तैयार है आज के दौर में हर प्रशासन का दुरप्रयोग होने से सरकार नही हिचकती है         हालात यह है कि आम जनता की आवाज तो सुनने का प्रश्न  ही नही बनता और जो कुछ लोग सरकार से आँख में आँखे डालकर सवाल कर ऱहे है उनपर इतनी पाबन्दी लगा दी जा रही है या तो वे चुप हो जाए या कानून के द्वारा या तो जान के डर से अपना मुँह बन्द करने पर मजबूर ...

आजाद भारत : वास्तव में

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आज अपना देश भारत आजादी के रंग में सराबोर होकर 73 स्वतंत्रता दिवस मना रहा है,आज देश अपने अमर बलिदानियों के कुर्बानी को नमन कर रहा है , आज साथ सी साथ कई बातों पर बात करने के साथ उन पर कठोर कदम लेने की जरूरत है और सोचने की बात है कि क्या हमारे पूर्वजो ने देश को आजादी दिलाने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए वो भी बिना एक पल सोचे उन्होंने देश को अंग्रेजो से आजादी के साथ ही और कई चीजों से भी आजादी का सपना देखा था अंग्रेजो से आजादी तो हमे मिल गयी लेकिन क्या जो सपना उन्होंने देखा था आजादी के बाद के भारत के लिए क्या वह पूरा हुआ या आज भी पिछले 72 सालो से साथ ही साथ आज 73 साल भी हो ही गया देश मे चुनाव होते गए लोग जीतते गए और देश हारता गया क्योंकि देश तो करोड़ो लोगो से बना है और प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री सांसद विधायक तो मात्र कुछ बनते है जो देश की भुखमरी,अशिक्षा, स्वास्थ्य,और प्रदूषण जैसी बातों को अनदेखा ही किये है जिसका परिणाम आज भो सामने है यहां लाखो लोग आज भी भूखे सो रहे है क्या देश को इस भूख से आजादी की जरूरत नही आज भी हालत यह है कि देश के जिम्मेदार पदासीन लोग इनकी भूख हरने के बज...

उत्तर प्रदेश

मैं उत्तर प्रदेश हूं भारत के संघ राज्यो में सबसे बड़ा स्टेट हूं हा मैं उत्तर प्रदेश हूं जहां एक बेटी की अस्मिता लूट ली जाती है और सरकार अपराधी को बचाती है वही कमजोर सा प्रदेश हूं हा मैं उत्तर प्रदेश हूं जहा नारी सम्मान के बड़े बड़े होर्डिंग लगते है दिल्ली से नेता नारी सम्मान पर ज्ञान देते है वही बड़ी बड़ी रैलियों का प्रदेश हूं मैं उत्तर प्रदेश हूं यहां घायल को ही सजा मिलती है पीड़ित को ही धमकी मिलती है अपराधियो को मुस्कुराता देखने वाला स्टेट हूं हा मैं उत्तर प्रदेश हूं

मोदी जी पिछले वादों पर क्यो नही लड़ रहे है?

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भारत ने 2014 में प्रचंड बहुमत देकर BJP को जिताया था और एक मजबूत सरकार इस विश्वास से बनाया था कि नई सरकार पुरानी सरकारों में जो कमियां थी उसे दूर करके देश को नई दिशा और दशा प्रदान करेगी । वर्तमान सत्तासीन पार्टी अपने 2014 के वादों पर कितना खरा उतरी उसका आकलन जनता को करना है और उसी पर वोट भी करना है वर्तमान में चुनाव चल रहे है और नेताओं के भाषण भी पूरे जोश में हो रहे है इन सब के बीच सबसे ज्यादा जो आशा थी लोगो को की अबकी बार चुनाव का पैटर्न बदलेगा और चुनाव पुराने स्वरूप से नए स्वरूप में होगा ।ऐसी आशा करना लाजमी भी है क्योंकि बहुमत देने के बाद ऐसा सोच जा सकता है, उससे भी ज्यादा इसलिए भी जरूरी था कि मोदी जी 2014 मे बदलाव के नाम पर ही वोट मांगे थे ,उस समय जनता त्रस्त थी तो उन्हें मोदी जी मे एक आशा की किरण दिखी की कुछ तो नया होगा लेकिन अगर वर्तमान में मोदी जी के भाषणों पर ध्यान दे तो हम क्या पाते है यही की जो मुद्दे भुनाकर मोदी जी सत्ता में आये थे उनको वो लगभग पूरी तरह से भूल से गये है जबकि अब तो समय था कि वो यह बताये की जो सरकार में आने के बाद से लगातार जिन योजनाओ का उन्होंने शिलान्य...

।।अब तुझे जानने लगा हूं।।

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।।अब तुझे जानने लगा हूं धीरे धीरे से ही सही,तुझे पहचानने लगा हूं आया तो था यहां तेरे दीदार को लेकिन धीरे धीरे तेरा हो जाने लगा हूं तुमको देखकर तुममे खो गया हूं बस तेरा ही तेरा मैं हो गया हूं तेरे नैनो की मधुशाला में डूबकर खुद को खुद से भूल गया हूं तुझमे किसी का अक्स मैं खोजता हूं धीरे धीरे तुझमे कुछ ढूढ़ता हूं तुझसे दिल की हजार बाते कहने को पल पल तुझको पुकारता हूं अब इतना समझने लगा हूं तुझे मैं दिल से चाहने लगा हूं दिल की सम्पूर्ण गहराई से अब तुझे जानने लगा हूं।।