स्वास्थ्य और शिक्षा तक सबकी पहुच आखिर कब?

         
              देश में आजकल एक दौर चल रहा है शिक्षा को लेकर जहां एक तरफ हर सरकारी संस्थाओं का नीजीकरण के तरफ सरकार अपना कदम बढ़ा रही है वही शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरत को भी सरकार किसी
न किसी रुप में लोगों की पहुच से दूर करने की लगातार कोशिश कर ही रही है
              अपने देश में आज भी एक बड़ी जनसंख्या रहती है जिनकी आमदनी इतनी ही है कि वो बस दो जून की रोटी का जुगाड़ कर लेते है या कभी कभी ऐसा होता है कि वो भी नसीब नही होता है उनके लिए बस कमाना खाना ही एकमात्र जरिया होता है जीना है तो कमाना है यदि काम करेगें तभी दो जून की रोटी का जुगाड़ होगा तो ऐसी स्थिति में उन जैसे परिवारो के बच्चो के लिए शिक्षा जैसी चीजे किसी सपने से कम नही होती है उनके दिमाग मे शिक्षा को लेकर कुछ होता ही नही ऐसे परिवार में अगर कोई बच्चा पैदा होता है तो यदि वह पढना चाहे तो कैसे पढ़ेगा यदि सरकारी संस्थाओं की फीस भी प्राईवेट संस्थाओं की तरह आसमान पर पहुचने लगेगी तो
              वैसे भी गिने चुने ही संस्थान है जो कि नाम मात्र की फीस लेकर अच्छी शिक्षा प्रदान करते है उनसे अच्छी अच्छी प्रतिभा पैदा होती है अगर इन संस्थाओं की फीस आसमान छूने लगेगी तो गरीब परिवार के बच्चे जो है उनकी संख्या वैसे भी गिनी चुनी ही है अगर सरकार उनमे भी बढ़त्तरी करने लगेगी तो वो गरीब माँ बाप कैसे सपना देख सकता है कि उनका बच्चा भी पढ़-लिख कर कुछ बन सकता है
              सरकारी संस्थाओं के महगी होने का कई लोग बखान भी करते नही थक रहे है उनको इस कदम में न जाने कौन सा फायदा दिख रहा है जो इस कदम की प्रशंसा में लगे है आप एक बार किसी प्राईवेट संस्था का दौरा कर लिजिए उनके फीस का जायजा लिजिए फिर आप सोचिए की भारत जैसे देश में कितने लोग है जो इतनी महगी शिक्षा ले सकते है किसान मजदूर का बच्चा क्या इतनी फीस दे सकता है
              वैसे भी जो लोग मंहगी शिक्षा ले सकते है उनके लिए तो देश भर में महगे शिक्षा संस्थाओ की भरमार है वो शौक से वहा से शिक्षा ले सकते है और लेते भी है और एक बात अगर सस्ती शिक्षा मिल रही है तो भला तो सबका है उसमें जो भी जाएगा सबको उसका लाभ मिलेगा मुझे नहीं लगता है कि कोई भी ऐसा इंसान है जो जान बूझकर ज्यादा पैसा देकर शिक्षा प्राप्त करना पसन्द करेगा
              देश में ऐसी नीतिया होनी चाहिए की शिक्षा और स्वास्थय जैसी मूलभूत चीजे लोगो तक हो सके तो मुफ्त ही हो अगर मुफ्त न हो तो कम से कम इतने कम में हो की कोई उनके पहुच से वंचित न रह सके और सरकार को सर्वहितकारी नीतिया बनानी ही चाहिए की लोगो का भला हो सके लोग शिक्षित हो स्वस्थ हो जिससे देश में जागरूक और समाज हितकारी लोग हो सके अगर देश के नागरिक तक उचित शिक्षा और स्वास्थय की पहुच होगी तो निश्चित ही हमारा देश और समाज जरूर ही नयी उचाईयो को प्राप्त करेगा 

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