प्रयास से कमी का पता भी चलता है

      प्रयास हमें हमारी कमियों से भी रूबरू कराती है यह पता मुझे भी आज एक बहुत ही छोटी सी घटना से हुयी तो मुझे लगा कि आप लोगों से बात करनी चाहिए तो लिख दिया है तो बात यह है कि मेरी हिन्दी की टाईपिंग की गति बहुत ही धीमी और त्रुटिपूर्ण थी जो कि मै लगातार कोशिश के बावजूद इस कमी से उबर नही पा रहा था
लेकिन करे भी तो क्या करे बस लगातार यह खोज रहा था कि क्या कमी है कि मुझे वह कमी मिल नही रही है
बस विश्वास इतना था कि आज नही तो कल मै इसमें कामयाब जरूर हो जाउगा क्योकी बचपन से यह सुनते आया हू कि अगर मेहनत अनवरत है तो कमी धीरे धीरे ही सही गायब जरूर हो जाती है
    तो आज की घटना से आपको रूबरू कराता हू कि मै आज जब मैं टाईपिंग करनी शुरू की तब तो मेरा मन बहुत ही ज्यादा शांत था जिसके फलस्वरूप मेरी गति बहुत ही सही हो रही थी साथ ही साथ होने वाली त्रुटि में भी बहुत ही ज्यादा सुधार था
      पहले और आज के प्रयास में बस इतना अंतर था कि आज जब मैं टाईपिंग कर रहा था तब मै बहुत ही शांत दिमाग से कर रहा था अन्य दिन में जब मैं टाईपिंग करता था तो उंगलियां बाद में चलती थी और दिमाग पहले ही भागता रहता था इससे पता चला कि आपको कोई काम सही ढ़ग से करनी है तो जरूरी है कि आपका दिमाग आपको कार्य से कदमताल मिलाकर ही चले और साथ मे दिमाग का साथ साथ होना भी जरूरी है अगर आपको काम में शत प्रतिशत देना है तो जरूरी है कि आप अपने चित्त को बहुत ही शांत रखें  शरीर के अंगो में और दिमाग में संतुलन होने का फायदा यह है कि आप कार्य को बहुत ही सटीक तरीके से कर सकते है जो कि आज के समय में बहुत जरूरी है आपका दिमाग उस वक्त उसी कार्य में हो जो आप कर रहे है पता चला कि काम कोई और कर रहे है दिमाग कुछ और सोच रहा है तो वह काम उतना सटीक नहीं होगा जितना कि शांत चित्त से किया गया कार्य
धन्यवाद!
       

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