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मैं और मेरी फिटनेस

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अगर कहू की मैं आलसी इंसान हूं । लोग आलसी होते है मैं बहुत ही बड़ा वाला हूं।शरीर अदरक जैसा कही से भी बढ़ रहा है लेकिन मुझे फर्क नही पड़ रहा है कि मैं क्यो बढ़ रहा हूं कही से भी मेरे फिट न होने की वजह है जो कि मुझे भलीभांति पता है फिर भी खुद को फिट होने के लिए कुछ करने के बजाय मेरे पास खुद को सही साबित करने के हजारों बहाने है उसमे पहला जो सबसे बड़ा है वह है मैं चीजो को टालने में बड़ा विश्वास करता हूं । कभी कभी लगता है यार सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए लोग कहते भी है कि सुबह उठने से आधा रोग यू ही कट जाता है ।यह बात मुझे बचपन से बताई जा रही है लेकिन मजाल है कि मैं की मैं कभी इस पर अमल कर लू मुझे लगता है ली यह फालतू है क्योंकि रोग तक पता नही लेकिन सुबह ही तो हमे नीद आती है वो भी शानदार वाली, जिसे miss तो हम कर नही सकते कोई और रास्ता हो तो बताओ दूसरी बात आती है जिम जाने की ।तो भाईसाहब मैं बता दू की जिम जाने के लिए चाहिए इच्छाशक्ति जो कि अपनी है बहुत ही कमजोर। सबसे बड़ी बात होती है जब जिम जाने की तो वैसे तो अपना दिमाग काम करना नही चाहता लेकिन इस बात पर वो भी चल जाता है तब अपने पास जिम को...

पूर्व सैनिक तेजबहादुर जी का राजनीति में आना

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बनारस में चुनाव काफी दमदार होता ही जा रहा है । अभी किसानों द्वारा मोदी जी के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात कही गयी थी उसी के साथ एक और धमाकेदार घोषणा पूर्व  जवान तेजबहादुर जी द्वारा चुनाव लड़ने को लेकर की गई है बात अगर तेजबहादुर को लेकर की जाए तो यह सुखद होगा कि बनारस की जनता इनको संसद भेजे वो इसलिए नही की वो एक जवान रह चुके है ,उसका कारण यह है कि वो आपके बनारस की आवाज संसद में बखूबी बुलन्द करेंगे क्योकि जो इंसान सेना में रहकर उसके द्वारा हुई ज्यादतियों के खिलाफ बिना डरे मुखर हो सकता है वह आपकी और बनारस के लिए भी पूरे दम खम से लड़ेगा । साथ ही साथ मुझे लगता है कि जवानों को भी संसद में प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए और जवानों के हक में एक जवान ही उनकी जरूरतों और परेशानियों के बारे में देश को और संसद को बता सकता है तेजबहादुर के बारे में अभी तक यह पता चला है कि वो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है इसका एक फायदा यह होगा कि वह अपनी बात संसद में बिना किसी दबाव के रख सकते है । सेना से तो बहुत लोग आए लेकिन वो किसी न किसी पार्टी के होकर रह गए उनको जब बात सेना के लिए बोलने की आती है तो वो अपनी जगह ही पक्...

।।कोई हमसे भी तो पूछो मैं क्या चाहता।।

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पापा चाहते बनू मैं IAS मम्मी चाहती बनू मैं टीचर अरे कोई हमसे भी तो पूछो मै क्या चाहता बहन चाहती बनू मैं पायलट भाई चाहता बनू मैं फौजी अरे कोई हमसे भी तो पूछो मैं क्या चाहता दादा कहते बनो किसान दादी कहती घर रहकर ही कर लो कुछ काम अरे कोई हमसे भी तो पूछो मैं क्या चाहता सब अपनी अपनी राय बताते मुझसे कोई न जानना चाहता अरे हमसे भी तो पूछो मैं क्या चाहता

धीरे-धीरे चुनाव असली मुद्दे की तरफ बढ़ रहा है

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वर्तमान चुनावी परिदृश्य में हर तरफ माहौल गर्म है,देश की दोनों बड़ी पार्टिया अपना अपना दाव खेल रही है। इसी बीच दो बड़ी बात हुई देश मे मिशन 'शक्ति' की सफलता के बाद मोदी जी का राष्ट्र के नाम संदेश और दूसरी राहुल गांधी का न्यूनतम आय देने की घोषणा न्यूनतम आय की घोषणा करके कांग्रेस भी फस गयी है वह घोषणा तो कर दी लेकिन यह बताने में उनके पसीने छूट रहे है कि आखिर इतने पैसे आएंगे कहा से ,दूसरी बात उसे लागू कैसे करेंगे ,इसका कोई वाजिब जबाब नही दे पा रहे है कांग्रेस वाले अब बात आती है मोदी जी की जो राष्ट्र के नाम संदेश देकर मिशन शक्ति के बदौलत एक बार फिर चिर परिचित अंदाज में चुनाव को देशभक्ति ,हिंदुस्तान पाकिस्तान, की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहे है ,लेकिन  DRDO और ISRO कोई आज की संस्था तो है नही कि आज पहली बार उन्होंने कोई परीक्षण किया हो इस परीक्षण पर काम तो पिछले कई सालों से चल रहा था जो अब आकर पूरा हुआ,यह मिशन शक्ति देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है तो इसे राजनीतिक मोड़ देने की क्या जरूरत है ,देश के वैज्ञानिक निसंदेह लगातार देश हित मे काम किये है ,जो ये राष्ट्र के नाम संदेस करके...

!!तुम्हे बताना भी जरूरी था!!

कुछ कहना तुमसे जरूरी था फिर मिलना तुमसे जरूरी था ये जो तेरे हिस्से प्यार लिए फिर रहा हु मैं तुम्हे बताना भी  जरूरी था उस पीले सूट में तुम कितनी हसीन दिखती थी तुम्हे बताना भी...

मैं कौन हूं ??

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मैं कौन हूं कभी कभी खुद से जब  मैं पूछता हूं क्या कोई जबाब  पाता हूं जिंदगी में अलग अलग किरदार निभाता हूं हर किसी के लिए अलग अलग बन जाता हूं मैं कौन हूं क्या खुद को जान पाता हूं अपनी माँ के लिए उसका राजा बेटा बन जाता हूं अपने पापा  का दुलारा लाला बन जाता हूं मैं कौन हूं क्या खुद को जान पाता हूं अपनी बहन का शरारती दोस्त बन जाता हूं अपने भाई के लिए खेलने का जरिया बन जाता हूं मैं कौन हूं क्या खुद को जान  पाता हूं दोस्तो के लिए उनका जिगरी यार बन जाता हूं गर्लफ्रेंड के शॉपिंग का क्रेडिट कार्ड बन जाता हूं मैं कौन हूं क्या खुद को जान पाता हूं अपने बॉस के लिए बधुआ मजदूर बन जाता हूं खुद को छोड़कर सबके लिए कुछ न कुछ बन जाता हूं पर काश मैं खुद के लिए कुछ बन पाता मैं कौन हूं ,काश खुद को जान पाता

प्रतियोगियों की सबसे बड़ी परेशानी?

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क्या भइया आप भी सरकारी नौकरी की तैयारी करते है ? या करते थे? तो आज हम इसी परेशान वर्ग की बात कर लेते है। जिसे हम कहते है प्रतियोगी अभ्यर्थी तो भइया क्या है न हम बड़े परेशान है अपने घर वालो से कम लेकिन बाहर वालो से ज्यादा । वो क्या है न हमारे गांव ,पड़ोस और रिश्तेदार है न उनको हमे चैन से रहने देना पसन्द ही नही होता ,जैसे ही मिलते है शांत सी ज़िन्दगी में उंगली शुरू।उ क्या होता है कि ई लोग पूरे मौके की तलाश में होते है जब तुमसे अकेले में मिलेंगे तब तो प्यार भरी बातें ,डंक तो इनका तब निकलता है जब तुम माँ बाप के पास बैठे होंगे तब इनका असली रूप आता है सामने ,तब ई पूछेंगे और बेटा कब आये,अउर अभी तक तैयारी ही कर रहे हो का, उसके बाद इनके किसी न किसी दोस्त का लड़का जरूर कही न कही कलेक्टर बना होता है तब ई बताएंगे कि हमारे फला मित्र के मित्र का लड़का 6 महीने में ही नौकरी में लग गया,तुम चार पांच साल से पढ़ ही रहे हो न इतना कह के ई भाईसाहब लोग तो चल देते है और फिर जो जली भुनी सुनने को मिलती है भाई साहब न, फिर वही माँ बाप जिनका प्यार बरस रहा होता है फिर उनको आ जाता है ego ,भाई साहब फिर जिसके लिए त...