धीरे-धीरे चुनाव असली मुद्दे की तरफ बढ़ रहा है
वर्तमान चुनावी परिदृश्य में हर तरफ माहौल गर्म है,देश की दोनों बड़ी पार्टिया अपना अपना दाव खेल रही है। इसी बीच दो बड़ी बात हुई देश मे मिशन 'शक्ति' की सफलता के बाद मोदी जी का राष्ट्र के नाम संदेश और दूसरी राहुल गांधी का न्यूनतम आय देने की घोषणा
न्यूनतम आय की घोषणा करके कांग्रेस भी फस गयी है वह घोषणा तो कर दी लेकिन यह बताने में उनके पसीने छूट रहे है कि आखिर इतने पैसे आएंगे कहा से ,दूसरी बात उसे लागू कैसे करेंगे ,इसका कोई वाजिब जबाब नही दे पा रहे है कांग्रेस वाले
अब बात आती है मोदी जी की जो राष्ट्र के नाम संदेश देकर मिशन शक्ति के बदौलत एक बार फिर चिर परिचित अंदाज में चुनाव को देशभक्ति ,हिंदुस्तान पाकिस्तान, की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहे है ,लेकिन DRDO और ISRO कोई आज की संस्था तो है नही कि आज पहली बार उन्होंने कोई परीक्षण किया हो इस परीक्षण पर काम तो पिछले कई सालों से चल रहा था जो अब आकर पूरा हुआ,यह मिशन शक्ति देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है तो इसे राजनीतिक मोड़ देने की क्या जरूरत है ,देश के वैज्ञानिक निसंदेह लगातार देश हित मे काम किये है ,जो ये राष्ट्र के नाम संदेस करके क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे थे वह अब चुनाव के लिए उतना असरदायी नही रह गया
राहुल गांधी का न्यूनतम आय का जो मुद्दा है वह कांग्रेस या BJP के लिए पचाना मुश्किल हो गया है। न्यूनतम आय घोषणा का फायदा आम जनमानस को यह हुआ कि जो चुनाव मुद्दे से भटक रहा था वो थोड़ा ही सही लेकिन आम लोगो के मुद्दे की तरफ मुड़ रहा है । अब BJP के भी नेताओ की बात सुन तो ये कहते सुने जा रहे है कि न्यूनतम आय तो हमारी योजना थी तो सवाल यह है कि इन्होंने 5 साल में लागू क्यो नही किया। दूसरा सवाल यह है की यह लोग कह रहे है कि इससे किसानों की दशा नही बदलेगी लोग कामचोर हो सकते है तो इन्होंने भी 6000 वाली स्किम लागू की है ।तीसरा सवाल है कि लोगो को कैसे पहचानेगे की कौन इस दायरे में है तो इन्होंने भी आयुष्मान योजना लागू की है
तो कुछ हो न हो लेकिन एक बार गलती से ही सही लेकिन आम आदमी चुनाव के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है जो कि देश और समाज दोनो के हित में है । जीते हारे कोई भी लेकिन जरूरी है कि चुनाव जनता के मुद्दे पर ही हो
न्यूनतम आय की घोषणा करके कांग्रेस भी फस गयी है वह घोषणा तो कर दी लेकिन यह बताने में उनके पसीने छूट रहे है कि आखिर इतने पैसे आएंगे कहा से ,दूसरी बात उसे लागू कैसे करेंगे ,इसका कोई वाजिब जबाब नही दे पा रहे है कांग्रेस वाले
अब बात आती है मोदी जी की जो राष्ट्र के नाम संदेश देकर मिशन शक्ति के बदौलत एक बार फिर चिर परिचित अंदाज में चुनाव को देशभक्ति ,हिंदुस्तान पाकिस्तान, की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहे है ,लेकिन DRDO और ISRO कोई आज की संस्था तो है नही कि आज पहली बार उन्होंने कोई परीक्षण किया हो इस परीक्षण पर काम तो पिछले कई सालों से चल रहा था जो अब आकर पूरा हुआ,यह मिशन शक्ति देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है तो इसे राजनीतिक मोड़ देने की क्या जरूरत है ,देश के वैज्ञानिक निसंदेह लगातार देश हित मे काम किये है ,जो ये राष्ट्र के नाम संदेस करके क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे थे वह अब चुनाव के लिए उतना असरदायी नही रह गया
राहुल गांधी का न्यूनतम आय का जो मुद्दा है वह कांग्रेस या BJP के लिए पचाना मुश्किल हो गया है। न्यूनतम आय घोषणा का फायदा आम जनमानस को यह हुआ कि जो चुनाव मुद्दे से भटक रहा था वो थोड़ा ही सही लेकिन आम लोगो के मुद्दे की तरफ मुड़ रहा है । अब BJP के भी नेताओ की बात सुन तो ये कहते सुने जा रहे है कि न्यूनतम आय तो हमारी योजना थी तो सवाल यह है कि इन्होंने 5 साल में लागू क्यो नही किया। दूसरा सवाल यह है की यह लोग कह रहे है कि इससे किसानों की दशा नही बदलेगी लोग कामचोर हो सकते है तो इन्होंने भी 6000 वाली स्किम लागू की है ।तीसरा सवाल है कि लोगो को कैसे पहचानेगे की कौन इस दायरे में है तो इन्होंने भी आयुष्मान योजना लागू की है
तो कुछ हो न हो लेकिन एक बार गलती से ही सही लेकिन आम आदमी चुनाव के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है जो कि देश और समाज दोनो के हित में है । जीते हारे कोई भी लेकिन जरूरी है कि चुनाव जनता के मुद्दे पर ही हो

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