प्रतियोगियों की सबसे बड़ी परेशानी?
क्या भइया आप भी सरकारी नौकरी की तैयारी करते है ? या करते थे?
तो आज हम इसी परेशान वर्ग की बात कर लेते है। जिसे हम कहते है प्रतियोगी अभ्यर्थी
तो भइया क्या है न हम बड़े परेशान है अपने घर वालो से कम लेकिन बाहर वालो से ज्यादा । वो क्या है न हमारे गांव ,पड़ोस और रिश्तेदार है न उनको हमे चैन से रहने देना पसन्द ही नही होता ,जैसे ही मिलते है शांत सी ज़िन्दगी में उंगली शुरू।उ क्या होता है कि ई लोग पूरे मौके की तलाश में होते है जब तुमसे अकेले में मिलेंगे तब तो प्यार भरी बातें ,डंक तो इनका तब निकलता है जब तुम माँ बाप के पास बैठे होंगे तब इनका असली रूप आता है सामने ,तब ई पूछेंगे और बेटा कब आये,अउर अभी तक तैयारी ही कर रहे हो का, उसके बाद इनके किसी न किसी दोस्त का लड़का जरूर कही न कही कलेक्टर बना होता है तब ई बताएंगे कि हमारे फला मित्र के मित्र का लड़का 6 महीने में ही नौकरी में लग गया,तुम चार पांच साल से पढ़ ही रहे हो न
इतना कह के ई भाईसाहब लोग तो चल देते है और फिर जो जली भुनी सुनने को मिलती है भाई साहब न, फिर वही माँ बाप जिनका प्यार बरस रहा होता है फिर उनको आ जाता है ego ,भाई साहब फिर जिसके लिए तुम जिम्मेदार नही हो वो भी तुम्हारी ही वजह से होता है,तब देखो असली वाला प्यार । उस समय अगर भारत की जीडीपी भी डाउन हो जाये तो जिम्मेदार तुम,मोटर फूंक जाए तो जिम्मेदार कौन तुम, क्योकि भाई तुम ही वो वजह हो जिसकी वजह से हर बार उनके किसी न किसी दोस्त का बेटा नौकरी जरूर पा जाता है,बाकी सब गालिया एक तरफ लेकिन क्या है न हर माँ बाप जितना भी गाली दे दे लेकिन प्यार बहुत करते है भाई
ऐसे लोगो को तुम्हारी सफलता असफलता से कोई लेना देना नही होता इनकी एक जिम्मेदारी होती है कि हमारा लड़का लड़की जो चाहे सो करे लेकिन मजाल है कि पड़ोसी और रिस्तेदारो के बच्चों की जिंदगी शांति से गुजर जाने दे
इस प्रकार के प्राणियों से निवेदन है कि अंकल आप अपना देखिए न ,हमे क्या करना है हम कुछ न कुछ कर ही लेंगे।
तो आज हम इसी परेशान वर्ग की बात कर लेते है। जिसे हम कहते है प्रतियोगी अभ्यर्थी
तो भइया क्या है न हम बड़े परेशान है अपने घर वालो से कम लेकिन बाहर वालो से ज्यादा । वो क्या है न हमारे गांव ,पड़ोस और रिश्तेदार है न उनको हमे चैन से रहने देना पसन्द ही नही होता ,जैसे ही मिलते है शांत सी ज़िन्दगी में उंगली शुरू।उ क्या होता है कि ई लोग पूरे मौके की तलाश में होते है जब तुमसे अकेले में मिलेंगे तब तो प्यार भरी बातें ,डंक तो इनका तब निकलता है जब तुम माँ बाप के पास बैठे होंगे तब इनका असली रूप आता है सामने ,तब ई पूछेंगे और बेटा कब आये,अउर अभी तक तैयारी ही कर रहे हो का, उसके बाद इनके किसी न किसी दोस्त का लड़का जरूर कही न कही कलेक्टर बना होता है तब ई बताएंगे कि हमारे फला मित्र के मित्र का लड़का 6 महीने में ही नौकरी में लग गया,तुम चार पांच साल से पढ़ ही रहे हो न
इतना कह के ई भाईसाहब लोग तो चल देते है और फिर जो जली भुनी सुनने को मिलती है भाई साहब न, फिर वही माँ बाप जिनका प्यार बरस रहा होता है फिर उनको आ जाता है ego ,भाई साहब फिर जिसके लिए तुम जिम्मेदार नही हो वो भी तुम्हारी ही वजह से होता है,तब देखो असली वाला प्यार । उस समय अगर भारत की जीडीपी भी डाउन हो जाये तो जिम्मेदार तुम,मोटर फूंक जाए तो जिम्मेदार कौन तुम, क्योकि भाई तुम ही वो वजह हो जिसकी वजह से हर बार उनके किसी न किसी दोस्त का बेटा नौकरी जरूर पा जाता है,बाकी सब गालिया एक तरफ लेकिन क्या है न हर माँ बाप जितना भी गाली दे दे लेकिन प्यार बहुत करते है भाई
ऐसे लोगो को तुम्हारी सफलता असफलता से कोई लेना देना नही होता इनकी एक जिम्मेदारी होती है कि हमारा लड़का लड़की जो चाहे सो करे लेकिन मजाल है कि पड़ोसी और रिस्तेदारो के बच्चों की जिंदगी शांति से गुजर जाने दे
इस प्रकार के प्राणियों से निवेदन है कि अंकल आप अपना देखिए न ,हमे क्या करना है हम कुछ न कुछ कर ही लेंगे।

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