मैं और मेरी फिटनेस
अगर कहू की मैं आलसी इंसान हूं । लोग आलसी होते है मैं बहुत ही बड़ा वाला हूं।शरीर अदरक जैसा कही से भी बढ़ रहा है लेकिन मुझे फर्क नही पड़ रहा है कि मैं क्यो बढ़ रहा हूं कही से भी
मेरे फिट न होने की वजह है जो कि मुझे भलीभांति पता है फिर भी खुद को फिट होने के लिए कुछ करने के बजाय मेरे पास खुद को सही साबित करने के हजारों बहाने है
उसमे पहला जो सबसे बड़ा है वह है मैं चीजो को टालने में बड़ा विश्वास करता हूं । कभी कभी लगता है यार सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए लोग कहते भी है कि सुबह उठने से आधा रोग यू ही कट जाता है ।यह बात मुझे बचपन से बताई जा रही है लेकिन मजाल है कि मैं की मैं कभी इस पर अमल कर लू मुझे लगता है ली यह फालतू है क्योंकि रोग तक पता नही लेकिन सुबह ही तो हमे नीद आती है वो भी शानदार वाली, जिसे miss तो हम कर नही सकते कोई और रास्ता हो तो बताओ
दूसरी बात आती है जिम जाने की ।तो भाईसाहब मैं बता दू की जिम जाने के लिए चाहिए इच्छाशक्ति जो कि अपनी है बहुत ही कमजोर। सबसे बड़ी बात होती है जब जिम जाने की तो वैसे तो अपना दिमाग काम करना नही चाहता लेकिन इस बात पर वो भी चल जाता है तब अपने पास जिम को टाइम बर्बादी बताने के अपने पास हजार बहाने होते है उस टाइम को हमे लगता है कि यह बच गया न तो हम दुनिया मुट्ठी में कर लेंगे लेकिन परिणाम तो पता ही है ?
तीसरा आता है कि बाजार के जंक फूड और तली भुनी चीजो से परहेज की तो भी अपना दिमाग तुरन्त एक्शन लेता है ऐसे कैसे भाई साहब आप नही खाएंगे तो जो भाई लोगो ने इतना इतना लगा कर इसे बनाया है वो बर्बाद नही हो जाएंगे। अगला सबसे महान बात आलसी लोग ही खोजते है और एकदम चौड़ में बताते है कि एक बार जीवन मिला है इसमें भी नही खाएंगे तब कब खाएंगे
तो यही सब हाल शरीर अदरक से आलू हो रहा है और हम सोये सोये यूट्यूब पर वीडियो देखकर फिट भी होते है और फिर सोये सोये ही दिलासा देते है कल से जिम शुरू और फिर सबको पता है कल तो होना नही है
तो भाई साहब मैं खुद के बारे में लिखा यह मेरा कल है अब मैं भी शुरू किया हु एक्सरसाइज और आप भी करिये दो चार दिन बुरा लगेगा फिर अच्छा भी लगेगा और होने भी लगेगा
करने से होता है ।करेंगे तभी होगा।
मेरे फिट न होने की वजह है जो कि मुझे भलीभांति पता है फिर भी खुद को फिट होने के लिए कुछ करने के बजाय मेरे पास खुद को सही साबित करने के हजारों बहाने है
उसमे पहला जो सबसे बड़ा है वह है मैं चीजो को टालने में बड़ा विश्वास करता हूं । कभी कभी लगता है यार सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए लोग कहते भी है कि सुबह उठने से आधा रोग यू ही कट जाता है ।यह बात मुझे बचपन से बताई जा रही है लेकिन मजाल है कि मैं की मैं कभी इस पर अमल कर लू मुझे लगता है ली यह फालतू है क्योंकि रोग तक पता नही लेकिन सुबह ही तो हमे नीद आती है वो भी शानदार वाली, जिसे miss तो हम कर नही सकते कोई और रास्ता हो तो बताओ
दूसरी बात आती है जिम जाने की ।तो भाईसाहब मैं बता दू की जिम जाने के लिए चाहिए इच्छाशक्ति जो कि अपनी है बहुत ही कमजोर। सबसे बड़ी बात होती है जब जिम जाने की तो वैसे तो अपना दिमाग काम करना नही चाहता लेकिन इस बात पर वो भी चल जाता है तब अपने पास जिम को टाइम बर्बादी बताने के अपने पास हजार बहाने होते है उस टाइम को हमे लगता है कि यह बच गया न तो हम दुनिया मुट्ठी में कर लेंगे लेकिन परिणाम तो पता ही है ?
तीसरा आता है कि बाजार के जंक फूड और तली भुनी चीजो से परहेज की तो भी अपना दिमाग तुरन्त एक्शन लेता है ऐसे कैसे भाई साहब आप नही खाएंगे तो जो भाई लोगो ने इतना इतना लगा कर इसे बनाया है वो बर्बाद नही हो जाएंगे। अगला सबसे महान बात आलसी लोग ही खोजते है और एकदम चौड़ में बताते है कि एक बार जीवन मिला है इसमें भी नही खाएंगे तब कब खाएंगे
तो यही सब हाल शरीर अदरक से आलू हो रहा है और हम सोये सोये यूट्यूब पर वीडियो देखकर फिट भी होते है और फिर सोये सोये ही दिलासा देते है कल से जिम शुरू और फिर सबको पता है कल तो होना नही है
तो भाई साहब मैं खुद के बारे में लिखा यह मेरा कल है अब मैं भी शुरू किया हु एक्सरसाइज और आप भी करिये दो चार दिन बुरा लगेगा फिर अच्छा भी लगेगा और होने भी लगेगा
करने से होता है ।करेंगे तभी होगा।
कृपया कैसा लगा जरूर बताएं।।

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