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गुड्डू के बाबूजी का जबाब

प्रिय गुड्डू के माई                        तोहार चिट्ठी मिलल पढ़ के बड़ा खुशी मिलल की सब केव घरे खुश और ठीक बा हमहू इहवा पे ठीकय बाटी तू त बड़ा नराज लागत बाटू हमरे उपर लेकिन तूहू इ जान ल कि दुनिया में अगर केहू के हम अपने जान से ज्यादा जान मानी ला त उ तोहई बाटू हो तू इ कइसे सोच लिहू कि हम तोहके घरवे प्यार करिला. तू इ जान ल कि इहवा पे हम कईसे रहत बाटी उ त हमार जियरय जानत बा. अगर हमार बस रहत त हम कबहु तोहके छोड़ के एतना दूरी आइत हो. उ त का बा कि सबके जिनगी में इ सब अइब करत ह त हमरव और तोहरव जीनगी में बा त आदमी के जीवन जब उ भगवान जी देहले बाटेन त कब तक घरे बइठले चली हो. अउर एक बात बातावा अबही त बड़ा कहत बाटू कि इहवे् प्यार करेला उहवा भूला जाएला त अगर हम घरवे तोहका प्यार करब तब तोहार इ सड़िया और तोहरे लाल के सइकिलावा कइसे आई तनि बातावा त                    उहवा पर माई और बाबू जी के खूब ख्याल करिहा इ ना कि हम ना बाटी घरे त तू उनका ख्याल न करा हम तोहरही भरोसे त आइल बाटी इहवा अउर हा...

गुड्डू के बाबू जी को पत्र

प्रिय गुड्डू के बाबू                           जब से पंजाब गईल बाटा तब से कवनो हाल खबर ना बा जी तोहार लागत बा कि कुल प्यार राउर के इहवे पर बुझाला अउर पंजाब जइते सब भुला जाला हो . एक बात बताई तोहरा तनिको पता बा कि ना हम इहवा पर कैसे कैसे जिनगी काटत बाटी अउर एक राउर बाटी कि कुछ बुझात नइखे. इहवा पर सब ठीक बा. राउर बातई कि सब कैसे बा. काम धन्धा ठीक ठाक चलत बा कि ना. खाना खईले जइहा अच्छे से अबकी जब अइला त शरीरवा में कूछ रहबै न कईल ते तनी खाना पीना पर ध्यान दिहल करा न कि हरदम कमाई पर ही लागल रही एक बात जान लिहअ कि जब शरीरवा रही तबै कमाई होई अउर तबै सब पूछि नही त केव पूछत नाय इहा पर अम्मा बाउ जी के तबियत कभी कभी ना ठीक रहेला एक दिन अम्मा कहत रहनी कि देखा अबकी गुड्डू के बाबू आवेला कि न उ पूछत रहनी कि होली आवत बा त  अइबा कि ना कि उहवे पर होली दिवाली बिताइबा देखा तिव तिवहारे चलि आवल करा आशा लागल रहेला कि अइबा. हमहू तोहरे राह देखत रहीला कि अइना त तनि हमरो मन हरियर होई जाई नही त बस बनअही और खइला मे जिनगी बितत रही. अरे जब भगवा...

पुराने से बेहतर हो नया साल

दोस्तो,            जैसा कि 2019 साल के आखिरी दो दिन ही बचे है फिर हम एक नए साल में प्रवेश कर जाएगे और जीवन में फिर नई चुनौतिया नए लक्ष्य लेकर हम आगे बढ़गे जैसा कि हम सबको विदित है कि हम लोग लगातार जीवन के नए आयामो में आगे बढ़ रहे है तो जाहिर सी बात है कि हमारा लक्ष्य भी लगातार नए तीव्रता की तरफ बढ़ रहा है हम नित नए चुनौतियो का सामना कर रहे है और आगे करते भी रहेगे और इन चुनौतियो का होना भी बहुत ही जरुरी है अगर ये चुनौतियां ही नही रहेगी तो फिर जिन्दगी की रौनक ही नही रहेगी          तो हम 2019 कोे छोड़कर 2020 में जा रहे है तो 2019 की पुरानी बुरी बातो को छोड़कर लेकिन उन बुरी बातो से हमें सीख जरुर लेनी है जिससे यह फायदा होगा कि वही पुरानी गलतिया हम दोबारा नही करे जो हमें पहले की दोस्तो अगर हम अपनी जन्दगी में कुछ भी गलत करते है तो हम ज्यादातर यह सोचते है कि चलो गलती तो हो गई लेकिन हम तब एक बहुत ही बड़ी गलती और कर देते है जो कि उस गलती से हम सबक नही लेते लेकिन अगर हमें जिन्दगी में यह चाहिये कि हम दोबारा उस गलत बात के भुक्तभोगी न बने...

स्वास्थ्य और शिक्षा तक सबकी पहुच आखिर कब?

                        देश में आजकल एक दौर चल रहा है शिक्षा को लेकर जहां एक तरफ हर सरकारी संस्थाओं का नीजीकरण के तरफ सरकार अपना कदम बढ़ा रही है वही शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरत को भी सरकार किसी न किसी रुप में लोगों की पहुच से दूर करने की लगातार कोशिश कर ही रही है               अपने देश में आज भी एक बड़ी जनसंख्या रहती है जिनकी आमदनी इतनी ही है कि वो बस दो जून की रोटी का जुगाड़ कर लेते है या कभी कभी ऐसा होता है कि वो भी नसीब नही होता है उनके लिए बस कमाना खाना ही एकमात्र जरिया होता है जीना है तो कमाना है यदि काम करेगें तभी दो जून की रोटी का जुगाड़ होगा तो ऐसी स्थिति में उन जैसे परिवारो के बच्चो के लिए शिक्षा जैसी चीजे किसी सपने से कम नही होती है उनके दिमाग मे शिक्षा को लेकर कुछ होता ही नही ऐसे परिवार में अगर कोई बच्चा पैदा होता है तो यदि वह पढना चाहे तो कैसे पढ़ेगा यदि सरकारी संस्थाओं की फीस भी प्राईवेट संस्थाओं की तरह आसमान पर पहुचने लगेगी तो               वै...

प्रयास से कमी का पता भी चलता है

      प्रयास हमें हमारी कमियों से भी रूबरू कराती है यह पता मुझे भी आज एक बहुत ही छोटी सी घटना से हुयी तो मुझे लगा कि आप लोगों से बात करनी चाहिए तो लिख दिया है तो बात यह है कि मेरी हिन्दी की टाईपिंग की गति बहुत ही धीमी और त्रुटिपूर्ण थी जो कि मै लगातार कोशिश के बावजूद इस कमी से उबर नही पा रहा था लेकिन करे भी तो क्या करे बस लगातार यह खोज रहा था कि क्या कमी है कि मुझे वह कमी मिल नही रही है बस विश्वास इतना था कि आज नही तो कल मै इसमें कामयाब जरूर हो जाउगा क्योकी बचपन से यह सुनते आया हू कि अगर मेहनत अनवरत है तो कमी धीरे धीरे ही सही गायब जरूर हो जाती है     तो आज की घटना से आपको रूबरू कराता हू कि मै आज जब मैं टाईपिंग करनी शुरू की तब तो मेरा मन बहुत ही ज्यादा शांत था जिसके फलस्वरूप मेरी गति बहुत ही सही हो रही थी साथ ही साथ होने वाली त्रुटि में भी बहुत ही ज्यादा सुधार था       पहले और आज के प्रयास में बस इतना अंतर था कि आज जब मैं टाईपिंग कर रहा था तब मै बहुत ही शांत दिमाग से कर रहा था अन्य दिन में जब मैं टाईपिंग करता था तो उंगलियां बाद में चलती थी और ...

लोकतंत्र में सवालों के गोल-मोल जबाव

                     विश्व का सबसे बड़े लोकतंत्र का दावा करते है हम और हमारी सरकारे, पर जब बात वाजिब सवालों का आता है तो क्या हम वो सब हक पाते है जो वास्तव में एक लोकतांत्रिक शासन या देश के लोगो को वाकई मिलना चाहिए । यह एक सोचने वाली बात है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में देश के हक में क्या हो रहा है उसमें जनता को ही बाहर का रास्ता दिखला दिया जा रहा है उसे बस आर्डर के माध्यम से पता चल जाता है कि सरकार यानी की जो बस कुछ लोगो में रह कर जीवन जी रही है उसने आपके लिए कुछ नियम या सौदा कर लिया है आपको कल से उसे मानना है आप चाह कर या तो चुप रहे या चिल्ला ही ले कौन आपकी बात  को सुनने को तैयार है आज के दौर में हर प्रशासन का दुरप्रयोग होने से सरकार नही हिचकती है         हालात यह है कि आम जनता की आवाज तो सुनने का प्रश्न  ही नही बनता और जो कुछ लोग सरकार से आँख में आँखे डालकर सवाल कर ऱहे है उनपर इतनी पाबन्दी लगा दी जा रही है या तो वे चुप हो जाए या कानून के द्वारा या तो जान के डर से अपना मुँह बन्द करने पर मजबूर ...

आजाद भारत : वास्तव में

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आज अपना देश भारत आजादी के रंग में सराबोर होकर 73 स्वतंत्रता दिवस मना रहा है,आज देश अपने अमर बलिदानियों के कुर्बानी को नमन कर रहा है , आज साथ सी साथ कई बातों पर बात करने के साथ उन पर कठोर कदम लेने की जरूरत है और सोचने की बात है कि क्या हमारे पूर्वजो ने देश को आजादी दिलाने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए वो भी बिना एक पल सोचे उन्होंने देश को अंग्रेजो से आजादी के साथ ही और कई चीजों से भी आजादी का सपना देखा था अंग्रेजो से आजादी तो हमे मिल गयी लेकिन क्या जो सपना उन्होंने देखा था आजादी के बाद के भारत के लिए क्या वह पूरा हुआ या आज भी पिछले 72 सालो से साथ ही साथ आज 73 साल भी हो ही गया देश मे चुनाव होते गए लोग जीतते गए और देश हारता गया क्योंकि देश तो करोड़ो लोगो से बना है और प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री सांसद विधायक तो मात्र कुछ बनते है जो देश की भुखमरी,अशिक्षा, स्वास्थ्य,और प्रदूषण जैसी बातों को अनदेखा ही किये है जिसका परिणाम आज भो सामने है यहां लाखो लोग आज भी भूखे सो रहे है क्या देश को इस भूख से आजादी की जरूरत नही आज भी हालत यह है कि देश के जिम्मेदार पदासीन लोग इनकी भूख हरने के बज...

उत्तर प्रदेश

मैं उत्तर प्रदेश हूं भारत के संघ राज्यो में सबसे बड़ा स्टेट हूं हा मैं उत्तर प्रदेश हूं जहां एक बेटी की अस्मिता लूट ली जाती है और सरकार अपराधी को बचाती है वही कमजोर सा प्रदेश हूं हा मैं उत्तर प्रदेश हूं जहा नारी सम्मान के बड़े बड़े होर्डिंग लगते है दिल्ली से नेता नारी सम्मान पर ज्ञान देते है वही बड़ी बड़ी रैलियों का प्रदेश हूं मैं उत्तर प्रदेश हूं यहां घायल को ही सजा मिलती है पीड़ित को ही धमकी मिलती है अपराधियो को मुस्कुराता देखने वाला स्टेट हूं हा मैं उत्तर प्रदेश हूं

मोदी जी पिछले वादों पर क्यो नही लड़ रहे है?

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भारत ने 2014 में प्रचंड बहुमत देकर BJP को जिताया था और एक मजबूत सरकार इस विश्वास से बनाया था कि नई सरकार पुरानी सरकारों में जो कमियां थी उसे दूर करके देश को नई दिशा और दशा प्रदान करेगी । वर्तमान सत्तासीन पार्टी अपने 2014 के वादों पर कितना खरा उतरी उसका आकलन जनता को करना है और उसी पर वोट भी करना है वर्तमान में चुनाव चल रहे है और नेताओं के भाषण भी पूरे जोश में हो रहे है इन सब के बीच सबसे ज्यादा जो आशा थी लोगो को की अबकी बार चुनाव का पैटर्न बदलेगा और चुनाव पुराने स्वरूप से नए स्वरूप में होगा ।ऐसी आशा करना लाजमी भी है क्योंकि बहुमत देने के बाद ऐसा सोच जा सकता है, उससे भी ज्यादा इसलिए भी जरूरी था कि मोदी जी 2014 मे बदलाव के नाम पर ही वोट मांगे थे ,उस समय जनता त्रस्त थी तो उन्हें मोदी जी मे एक आशा की किरण दिखी की कुछ तो नया होगा लेकिन अगर वर्तमान में मोदी जी के भाषणों पर ध्यान दे तो हम क्या पाते है यही की जो मुद्दे भुनाकर मोदी जी सत्ता में आये थे उनको वो लगभग पूरी तरह से भूल से गये है जबकि अब तो समय था कि वो यह बताये की जो सरकार में आने के बाद से लगातार जिन योजनाओ का उन्होंने शिलान्य...

।।अब तुझे जानने लगा हूं।।

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।।अब तुझे जानने लगा हूं धीरे धीरे से ही सही,तुझे पहचानने लगा हूं आया तो था यहां तेरे दीदार को लेकिन धीरे धीरे तेरा हो जाने लगा हूं तुमको देखकर तुममे खो गया हूं बस तेरा ही तेरा मैं हो गया हूं तेरे नैनो की मधुशाला में डूबकर खुद को खुद से भूल गया हूं तुझमे किसी का अक्स मैं खोजता हूं धीरे धीरे तुझमे कुछ ढूढ़ता हूं तुझसे दिल की हजार बाते कहने को पल पल तुझको पुकारता हूं अब इतना समझने लगा हूं तुझे मैं दिल से चाहने लगा हूं दिल की सम्पूर्ण गहराई से अब तुझे जानने लगा हूं।।

तुम आज भी याद आते हो

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।।तुम आज भी याद आते हो जब भी सुबह सुबह बच्चों को कच्ची नीद से जगाया जाता है जबरजस्ती से ही उनको नहलाया जाता है फिर ढेर सारा तेल चुपड़कर उनके बाल चिपकाया जाता है फिर स्कूल वाली आसमानी नीली ड्रेस में उन्हें स्कूल पहुचाया जाता है,तब ए बचपन तुम याद आते हो जब बच्चों को प्रार्थना की लाइन में लगते देखता हूं उस लाइन में एक दूसरे की पैंट खीचते देखता हूं टीचर से शरारत पकड़े जाने पर उनका सहम जाना देखता हूं फिर टीचर द्वारा पिटाई से बच जाने पर आंखों आंखों में मुस्कुराना देखता हूं,तब ए बचपन तुम याद आते हो जब होमवर्क की कॉपी भूलकर मासूम बहाने बनाना देखता हूं सवाल का जबाब न याद आने पर दोस्त का बगल से सही जबाब फुसफुसाना देखता हूं हल्की हल्की बातो पर एक दूसरे से रुठ जाना -मान जाना देखता हूं जब बच्चों को टिफिन से चोरी चोरी क्लास के बीच मे ही खाते देखता हूं जब उनको अपने दोस्त के टिफिन से शरारत में ही खाना निकालते देखता हूं एक दोस्त के पैसे से खरीदी नीली पीली टाफियां खरीदकर सबको बाटकर खाते देखता हू,तब ए बचपन तुम याद आते हो छुट्टी वाली घंटी की तरफ शाम को बेसब्री से देखना देखता हूं घंट...

निराशा को आशा में बदलिए :पॉजिटिव सोचिये

आज के दौर में खुद को इस तनाव भरे माहौल में पॉजिटिव ऊर्जा से भरपूर रखना कोई आसान काम नही है।अपने चारों तरफ नजर घुमाइए तो बहुत से लोग ऐसे मिल जाएंगे जो छोटी छोटी बातों को लेकर निराश हताश बैठे है । उन्हें जिंदगी में अपनी इस हताशा से बाहर निकलने का रास्ता ही नही दिखाई देता है। खुद को हताश होने में काफी हद तक हम खुद जिम्मेदार है और हमसे ज्यादा हमारे आसपास का माहौल ज़िम्मेदार है ऐसा मैं केवल कह नही रहा हूं उसके मेरे पास पर्याप्त कारण भी है। आप पहले अपना बचपन याद करिये जब आप छोटे होते थे आपको हार जीत जैसे चीजो से बेफिक्र थे तब कुछ लोग रात में आपको कुछ ऐसी बकवास बाते बताकर डरा देते थे वो डर हमारे मन मे इतना गहरा प्रभाव छोड़ती थी कि बचपन से किशोर होते होते मन के किसी न किसी कोने में वो रात वाला डर घर कर ही लेता था जो कि अब जाकर पता चला कि अंधेरे से डरने जैसा कुछ भी नही है फिर आप अपना स्कूल के दिन याद करिये तब लोग आपके मन मे पास फेल और नम्बर ,क्लास में स्थान लाने जैसी चीजों के बारे में तुलना करते है कि तुम कम नम्बर पा रहे हो तुम्हारा कुछ नही हो सकता ,तुम बेकार हो और यह ड्रामा केवल बड़े क्लासो म...

क्योकि वो माँ है

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मैं आज भी देर से आया था ,घर और मोहल्ले में लगभग सब सो गए थे सुनसान गली में अगर कोई चल रहा था तो वह मैं था और साथ मे कोई थी तो मेरी परछाई,जो कभी साथ चलती तो कभी नही ,ऐसा इसलिए कि गली की हर स्ट्रीट लाइट जल नही रही थी,घर पर आज भी रोज की तरह कोई जाग रहा था तो वो मम्मी थी मेरी, जानता तो था कि वो मेरे इंतज़ार में ही जाग रही है जो कि उनकी उनीदी आंखों से पता चल रहा था,फिर भी मैने पूछा कि मम्मी सो गई होती अभी तक क्यो जाग रही हो,आज फिर मम्मी ने अपनी आंखों की नीद को छुपाते हुए बोली कि नही बेटा वो नीद ही नही आती अब तो इस उम्र में वैसे घर मे हर कोई होता है लेकिन इंतज़ार अगर किसी को सबसे ज्यादा होता है तो वो माँ को ही होता है

YOUTUBE की दुनिया

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आज के दौर में जब दुनिया की अधिकांश जनसंख्या इंटरनेट से जुड़ गई है। आज हर कोई किसी भी छोटी से छोटी जानकारी के लिए गूगल और यूट्यूब की शरण मे जाने में जरा भी नही हिचकता । यूट्यूब और गूगल आन जनमानस की जिंदगी में आकर उनके जीवन को आसान बनाने के साथ उनके जीवन का हिस्सा बन गए है इस तेजी से बदलते दौर में यूट्यूब लोगो के जीवन का अहम हिस्सा हो गया है । यूट्यूब ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा लोग पलक झपकते ही जिस भी बात को जानना चाहते है उसके बारे में तुरंत जानकारी मिल जाती है । आज कल लोग यूट्यूब को शौकिया और अपने कैरियर के रूप में भी चुन रहे है वह चाहे शिक्षा के क्षेत्र में हो मनोरंजन के क्षेत्र में या कुकिंग के क्षेत्र में लोग अपना कैरियर के रूप में चुन रहे है यूट्यूब को कैरियर बनाना आज कल हर युवा का शौक है।आज के वक्त में जब इंटरनेट डेटा इतना सस्ता है और लोगो की आसान पहुच हो गई है सोशल मीडिया तक तो लोगो के मन मे कभी न कभी यह सवाल जरूर आता है कि क्यो न हम भी यूट्यूब पर किसी न किसी रूप में आये यूट्यूब आज के समय मे इतने तेजी से बढ़ रहा है और लोग इसे कैरियर के तौर पर इसलिए भी ले रहे है कि एक ...

डॉ भीमराव आंबेडकर : कुछ खास बातें

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आज भारतीय इतिहास के एक महान नेता ,समाजसेवी, दलित,पिछड़ो और महिलाओं को बराबरी का हक दिलवाने वाले  डा आम्बेडकर की जयंती है। आम्बेडकर जी का पूरा जीवन संघर्षो से भरा पड़ा है उनके जीवन से हर किसी को अपने हक के लिए लड़ने की सीख मिलती है ,उन्होंने अपने जीवन मे जो सामाजिक छुआछूत वाली बीमारी का सामना किया था बाद में उन्होंने उसे समाज से खत्म करने की पूरी कोशिश की उन्होंने हमेशा लोगो से धर्म के बारे में कहा कि मैं  केवल वही धर्म को मानता हूं जो स्वतन्त्रता,समानता और भाईचारा को सिखाए और वर्तमान परिदृश्य को देखे तो हमे ऐसे ही धर्म की जरूरत है जिस तरह से लोग धार्मिक कट्टरता की तरफ बढ़कर एक दूसरे के दुश्मन बन रहे है तो हमे ऐसे ही धर्म की जरूरत है जो सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दे और समाज मे अमन और शांति प्रदान करे आम्बेडकर जी ने कहा है कि हमे ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण हो मन की शांति बढ़े बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो,अगर हम देखे हमे शिक्षा की जरूरत इसी के लिए ही है अगर चरित्र निमार्ण होगा बुद्धि का विकास होगा और हर इंसान अपने पैरों पर खड़ा होगा तो देश का वि...

देखो तुम यू रूठा न करो

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।।देखो तुम यू रूठा न करो मुझसे नफरत झूठा न करो बस मुझको यू रिझाने खातिर देखो गुस्सा यू झूठा न करो। देखो तुम दिल यू ना तोड़ा करो कभी कभी मुझको देखा तो करो बस मुझको यू दिलासा देने के खातिर मुझसे मिलने यू आया तो करो। देखो तुम रात में ऑनलाइन आया तो करो मुझसे खुद के हाल सुनाया तो करो बस मुझसे हाल ए दिल कहने के खातिर देखो वाट्सअप चलाया तो करो। देखो तुम सुबह सुबह लेट आया न करो मुझसे इंतज़ार करवाया न करो बस मुझको यू चिढ़ाने खातिर देखो तुम औरो से बतियाया न करो। देखो मैं यू तुमको चाहता दिल से बहुत ही तुमको मानता हूं तुम भी कम से कम देखा तो करो देखो तुम यू रूठा न करो।।

BJP2014 में और BJP2019 में

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वर्तमान समय मे चारो तरफ बस एक ही माहौल छाया हुआ है वो है चुनाव बस केवल चुनाव,वर्तमान परिदृश्य पर निगाह फेरे तो हम क्या पाते है यही की राजनीतिक पार्टियां भले ही विश्व समुदाय से आगे निकलने की बात करती हो लेकिन चुनाव आते ही धीरे धीरे वो अपने पुराने रंग में वापस आ जाती है इसका आकलन आप इस बात से कर सकते है आप इस वक्त जब पार्टियों को जनता को अपना भविष्य का रोडमैप समझाना चाहिए तो वो लोग बस किसी तरह से जनता को धर्म ,जाति और राष्ट्र के नाम पर भटका रहे है वर्तमान सत्ता की जो पार्टी है उसका आप 2014 के भाषणों को सुने खासकर मोदी जी के तो आप पाएंगे कि तब इनके पास विजन था कि हम पुरानी सरकार से कुछ ज्यादा बेहतर करेंगे अब कितना बेहतर किये या नही किये यह आकलन आपको करना है यह मैं आप पर छोड़ रहा हूं,तब मोदी जी पुरानी सरकार पर दोष मढ़ने के साथ उदाहरण भी देते थे कि जो इन्होंने गलत किया उसे वो कैसे सही कर सकते है लेकिन फिर आता है2019 का चुनाव तब तक मोदी जी  पांच साल प्रधानमंत्री रह चुके है अब उन पर जनता को बताने के लिए केवल वादे और पुरानी सरकारों की नाकामियां नही है अब उनको आगे के विजन के साथ पांच ...

चुनावी साल :विपक्ष से सवाल

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चुनावी महासमर में लोग पूरी तरह से सराबोर हो गए है। नेता लोग वादों की घुट्टी पिला रहे है ,हर नेता खुद को सत्य और न्याय की मूर्ति बताने में लगा है और अपने विरोधी नेता और पार्टी को धूर्त और बेईमान साबित करने में पूरा जोर लगाए हुए है इसके पहले हम चुनाव में सत्ता पक्ष को वोट करने से पहले कौन से सवाल करे उस पर बात हो चुकी है तो आज हम बात विपक्ष की करते है कि आखिर उनसे क्या सवाल किए जाए वोट देने से पहले विपक्ष पार्टी सत्ता पक्ष पर सवाल दागती है ,सत्ता पार्टी के फैसले ,योजनाओ पर सवाल उठाती है जो कि जायज भी है कि अगर उनमे कुछ कमियां है तो उसे ध्यान में लाया जाए ,इस चुनाव में विपक्ष की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह जिन मुद्दों पर सत्तासीन सरकार को घेर रही है उससे खुद कैसे निपटेगी क्योकि सवाल उठना सबसे ही आसान काम है लेकिन सवाल का हल खोजना उतनी ही टेढ़ी खीर है वर्तमान में भारत की युवा पीढ़ी बेरोजगारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है इसके लिए वर्तमान में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी जो कि कांग्रेस है उसे यह बताना चाहिए कि इससे कैसे निजात दिलाएंगे और उनके पास ऐसा क्या है जो इस सरकार से अलग है आज वर्तम...

देखो फिर चुनाव आया

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।।देखो फिर चुनाव है आया नेताओ को आपके द्वार है लाया नेता लाये भर भर के वादे जनता जाने इनके इरादे नेता आए हमे लुभाने वादों में फिर हमे फसाने पांच साल फिर न दिखने वाले वादे को फिर भूलने वाले हमको स्वर्ग का झांसा देंगे खुद को स्वर्ग की आशा देंगे नही फिर लौट के आने वाले जीतकर चुनाव जाने वाले हमारा  वोट लेकर जाने वाले हमी पर रौब जमाने वाले हम लेंगे पूरा हिसाब नेता जो आये हमारे द्वार हम न अब बहकने वाले अपने मुद्दे समझने वाले देंगे हम उसी को वोट जो करे देश के लोगो का सपोर्ट देखो फिर चुनाव है आया नेताओ को आपके द्वार है लाया।।

BJP के संकल्प पत्र में क्या कुछ खास

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चुनाव के मौसम की सरगर्मी को बढ़ाते हुए भारतीय लोकतंत्र की वर्तमान सत्तासीन पार्टी BJP ने भी अपना घोषणा पत्र 'संकल्प पत्र' के नाम से जारी किया है।यदि वर्तमान दृश्य को देखा जाए तो हमारे देश की महत्वपूर्ण समस्या से ग्रस्त जो क्षेत्र है उनमें प्रमुख रूप से किसान ,शिक्षा,स्वास्थ्य,बेरोजगारी और स्वस्थ परिवेश आते है । स्वस्थ परिवेश भले ही अब तक मुद्दा न रहा हो लेकिन धीरे धीरे यह भी मुख्य मुद्दे में शामिल हो रहा है आज BJP ने अपना घोषणा पत्र जनता के सामने प्रकाशित किया है ,तो हम उनके मुख्य बातो पर बात कर लेते है 1.किसान- अगर हम देखे तो किसान इस चुनाव को प्रमुखता से सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे है,भारत की एक बहुत ही बड़ी जनसंख्या किसान के रूप में देश मे निवास करते है तो जाहिर सी बात है हर कोई इन्हें लुभाना चाहेगा, पहली बात जो किसानों से की गई है वो यह है कि 2022 तक आय दुगुनी करेंगे तो यह तो पुराना ही वादा है इनका इस पर कायदे से ये यह बताये की पांच साल में कितना हुआ ,दूसरी बात किसान को सम्मान निधि देंगे इस पर तो कुछ कह नही सकते मिल जाये तो सहायता तो होगी लेकिन कही बाद में इसे भी जु...