चुनावी साल :विपक्ष से सवाल


चुनावी महासमर में लोग पूरी तरह से सराबोर हो गए है। नेता लोग वादों की घुट्टी पिला रहे है ,हर नेता खुद को सत्य और न्याय की मूर्ति बताने में लगा है और अपने विरोधी नेता और पार्टी को धूर्त और बेईमान साबित करने में पूरा जोर लगाए हुए है
इसके पहले हम चुनाव में सत्ता पक्ष को वोट करने से पहले कौन से सवाल करे उस पर बात हो चुकी है तो आज हम बात विपक्ष की करते है कि आखिर उनसे क्या सवाल किए जाए वोट देने से पहले
विपक्ष पार्टी सत्ता पक्ष पर सवाल दागती है ,सत्ता पार्टी के फैसले ,योजनाओ पर सवाल उठाती है जो कि जायज भी है कि अगर उनमे कुछ कमियां है तो उसे ध्यान में लाया जाए ,इस चुनाव में विपक्ष की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह जिन मुद्दों पर सत्तासीन सरकार को घेर रही है उससे खुद कैसे निपटेगी क्योकि सवाल उठना सबसे ही आसान काम है लेकिन सवाल का हल खोजना उतनी ही टेढ़ी खीर है
वर्तमान में भारत की युवा पीढ़ी बेरोजगारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है इसके लिए वर्तमान में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी जो कि कांग्रेस है उसे यह बताना चाहिए कि इससे कैसे निजात दिलाएंगे और उनके पास ऐसा क्या है जो इस सरकार से अलग है
आज वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या हो गयी है लोगो को साफ हवा पानी नही मिल रहे है इस पर क्या कदम लिए जाएंगे यह ऐसा मुद्दा है जिस पर न तो सत्ता के लोग न ही विपक्ष के लोग कुछ बोलते है ऐसा लगता है यह कोई मुद्दा ही नही है लेकिन दिल्ली जैसे शहरों के लिए इससे बड़ा मुद्दा हो ही नही सकता
शिक्षा जैसी बुनियादी और महत्वपूर्ण जैसे मुद्दे पर तो कांग्रेस ने थोड़ा बड़ा कदम लिया है कि जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करेंगे ,लेकिन सवाल फिर वही की शिक्षा में आप क्या कुछ नया और बेहतर करेंगे
इसी प्रकार स्वास्थ्य, गरीबी  और किसान भी बहुत बड़े मुद्दे है इनके लिए वादे की पोटली देना सबसे आसान है जो कि इतने सालों से होता ही आया है ,लेकिन अब कुछ अलग होना चाहिए 
जनता को अब सवाल पक्ष और विपक्ष दोनो से ही करना होगा तभी एक नई राजनीति और बेहतर भविष्य का निर्माण हो सकेगा।।

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