BJP2014 में और BJP2019 में
वर्तमान समय मे चारो तरफ बस एक ही माहौल छाया हुआ है वो है चुनाव बस केवल चुनाव,वर्तमान परिदृश्य पर निगाह फेरे तो हम क्या पाते है यही की राजनीतिक पार्टियां भले ही विश्व समुदाय से आगे निकलने की बात करती हो लेकिन चुनाव आते ही धीरे धीरे वो अपने पुराने रंग में वापस आ जाती है इसका आकलन आप इस बात से कर सकते है आप इस वक्त जब पार्टियों को जनता को अपना भविष्य का रोडमैप समझाना चाहिए तो वो लोग बस किसी तरह से जनता को धर्म ,जाति और राष्ट्र के नाम पर भटका रहे है
वर्तमान सत्ता की जो पार्टी है उसका आप 2014 के भाषणों को सुने खासकर मोदी जी के तो आप पाएंगे कि तब इनके पास विजन था कि हम पुरानी सरकार से कुछ ज्यादा बेहतर करेंगे अब कितना बेहतर किये या नही किये यह आकलन आपको करना है यह मैं आप पर छोड़ रहा हूं,तब मोदी जी पुरानी सरकार पर दोष मढ़ने के साथ उदाहरण भी देते थे कि जो इन्होंने गलत किया उसे वो कैसे सही कर सकते है
लेकिन फिर आता है2019 का चुनाव तब तक मोदी जी पांच साल प्रधानमंत्री रह चुके है अब उन पर जनता को बताने के लिए केवल वादे और पुरानी सरकारों की नाकामियां नही है अब उनको आगे के विजन के साथ पांच साल का हिसाब भी जनता को देना है लेकिन इस समय के उनके चुनावी भाषणों पर ध्यान दे तो क्या दिखाई देता है कि अब वो आगे के विजन और अपने काम पर बात बहुत ही कम कर रहे है अब बस एक ही बात कर रहे है कि जितने भी देश मे गलत काम हुए है या हो रहे है उसके लिए पूर्व की सरकारे ही दोषी है ,अब भी मोदी जी कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार मान रहे है लेकिन हम देखे तो इन्होंने जितना हो सका उतना पुरानी नीतियों को बदला है
फिर भी इनकी बातो में अब राष्ट्रवाद को जगह देकर जनता को भावनाओ में लेकर वोट बटोरने की जुगत में लगे है अभी अभी मोदी जी ने कहा कि क्या पहली बार जो लोग वोट कर रहे है क्या वो अपना पहला वोट देश की सेना को नही देंगे इस प्रकार की बाते केवल इसलिए कि लोग किसी भी तरह से अपने मूलभूत मुद्दों से भटक जाए,मोदी जी को हमेशा से शिकायत रही है कि सेना को राजनीति में न लाया जाए लेकिन जब शुरुवात खुद कर रहे है तो बाकियो से क्या आशा करेंगे
एक बात और हुई जो यूपी वाले बाबा जी ने ट्वीट कर के कहा है कि पूरा विपक्ष अली का है और सत्ता के लोग बजरंग बली के तो इससे हम क्या समझे कि क्या यह सबका साथ सबका विकास की राजनीति है या लोगो के बीच साम्प्रदायिकता को बढ़ाने की, दुसरो को दुकड़े टुकड़े गैंग वाला आरोप इस पार्टी के लोग तुरंत लगाते है तो इस बयान से क्या निष्कर्ष निकाला जाए कि यह बयान सामाजिक सौहार्द बनाएगा
आखिर देश की सबसे बड़ी पार्टी जिसे पूर्ण बहुमत मिला वो क्यो जमीनी मुद्दों से चुनाव को संप्रदायिकता और राष्ट्रवाद की तरफ मोड़ रही है क्या इनके पास जनता के मुद्दों पर किये गए काम को बताने के लिए कुछ नही है जिसे लेकर ये जनता के पास जाए,क्या मोदी लहर के नाम पर जीत कर आये सांसदों ने कुछ ऐसा नही किया जिसके नाम पर वोट मांग सके।आखिर क्या बात है जो ये लोग जमीनी मुद्दों पर नही बात कर रहे है ।सोचिये और विमर्श करिये तब वोट करिये।।
वर्तमान सत्ता की जो पार्टी है उसका आप 2014 के भाषणों को सुने खासकर मोदी जी के तो आप पाएंगे कि तब इनके पास विजन था कि हम पुरानी सरकार से कुछ ज्यादा बेहतर करेंगे अब कितना बेहतर किये या नही किये यह आकलन आपको करना है यह मैं आप पर छोड़ रहा हूं,तब मोदी जी पुरानी सरकार पर दोष मढ़ने के साथ उदाहरण भी देते थे कि जो इन्होंने गलत किया उसे वो कैसे सही कर सकते है
लेकिन फिर आता है2019 का चुनाव तब तक मोदी जी पांच साल प्रधानमंत्री रह चुके है अब उन पर जनता को बताने के लिए केवल वादे और पुरानी सरकारों की नाकामियां नही है अब उनको आगे के विजन के साथ पांच साल का हिसाब भी जनता को देना है लेकिन इस समय के उनके चुनावी भाषणों पर ध्यान दे तो क्या दिखाई देता है कि अब वो आगे के विजन और अपने काम पर बात बहुत ही कम कर रहे है अब बस एक ही बात कर रहे है कि जितने भी देश मे गलत काम हुए है या हो रहे है उसके लिए पूर्व की सरकारे ही दोषी है ,अब भी मोदी जी कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार मान रहे है लेकिन हम देखे तो इन्होंने जितना हो सका उतना पुरानी नीतियों को बदला है
फिर भी इनकी बातो में अब राष्ट्रवाद को जगह देकर जनता को भावनाओ में लेकर वोट बटोरने की जुगत में लगे है अभी अभी मोदी जी ने कहा कि क्या पहली बार जो लोग वोट कर रहे है क्या वो अपना पहला वोट देश की सेना को नही देंगे इस प्रकार की बाते केवल इसलिए कि लोग किसी भी तरह से अपने मूलभूत मुद्दों से भटक जाए,मोदी जी को हमेशा से शिकायत रही है कि सेना को राजनीति में न लाया जाए लेकिन जब शुरुवात खुद कर रहे है तो बाकियो से क्या आशा करेंगे
एक बात और हुई जो यूपी वाले बाबा जी ने ट्वीट कर के कहा है कि पूरा विपक्ष अली का है और सत्ता के लोग बजरंग बली के तो इससे हम क्या समझे कि क्या यह सबका साथ सबका विकास की राजनीति है या लोगो के बीच साम्प्रदायिकता को बढ़ाने की, दुसरो को दुकड़े टुकड़े गैंग वाला आरोप इस पार्टी के लोग तुरंत लगाते है तो इस बयान से क्या निष्कर्ष निकाला जाए कि यह बयान सामाजिक सौहार्द बनाएगा
आखिर देश की सबसे बड़ी पार्टी जिसे पूर्ण बहुमत मिला वो क्यो जमीनी मुद्दों से चुनाव को संप्रदायिकता और राष्ट्रवाद की तरफ मोड़ रही है क्या इनके पास जनता के मुद्दों पर किये गए काम को बताने के लिए कुछ नही है जिसे लेकर ये जनता के पास जाए,क्या मोदी लहर के नाम पर जीत कर आये सांसदों ने कुछ ऐसा नही किया जिसके नाम पर वोट मांग सके।आखिर क्या बात है जो ये लोग जमीनी मुद्दों पर नही बात कर रहे है ।सोचिये और विमर्श करिये तब वोट करिये।।

Comments
Post a Comment