निराशा को आशा में बदलिए :पॉजिटिव सोचिये
आज के दौर में खुद को इस तनाव भरे माहौल में पॉजिटिव ऊर्जा से भरपूर रखना कोई आसान काम नही है।अपने चारों तरफ नजर घुमाइए तो बहुत से लोग ऐसे मिल जाएंगे जो छोटी छोटी बातों को लेकर निराश हताश बैठे है । उन्हें जिंदगी में अपनी इस हताशा से बाहर निकलने का रास्ता ही नही दिखाई देता है।
खुद को हताश होने में काफी हद तक हम खुद जिम्मेदार है और हमसे ज्यादा हमारे आसपास का माहौल ज़िम्मेदार है ऐसा मैं केवल कह नही रहा हूं उसके मेरे पास पर्याप्त कारण भी है। आप पहले अपना बचपन याद करिये जब आप छोटे होते थे आपको हार जीत जैसे चीजो से बेफिक्र थे तब कुछ लोग रात में आपको कुछ ऐसी बकवास बाते बताकर डरा देते थे वो डर हमारे मन मे इतना गहरा प्रभाव छोड़ती थी कि बचपन से किशोर होते होते मन के किसी न किसी कोने में वो रात वाला डर घर कर ही लेता था जो कि अब जाकर पता चला कि अंधेरे से डरने जैसा कुछ भी नही है
फिर आप अपना स्कूल के दिन याद करिये तब लोग आपके मन मे पास फेल और नम्बर ,क्लास में स्थान लाने जैसी चीजों के बारे में तुलना करते है कि तुम कम नम्बर पा रहे हो तुम्हारा कुछ नही हो सकता ,तुम बेकार हो और यह ड्रामा केवल बड़े क्लासो में ही नही छोटे छोटे बच्चों के साथ भी होता है उस समय बच्चे इतने छोटे होते है कि वो इस चीज को मान लेते है वही चीज धीरे धीरे उनके मन मे घर कर लेती है जिससे बाहर आने में उन्हें बहुत समय लगता है कभी कभी तो वो हमेशा के लिए ही मन मे बैठ ही जाती है
अभी देश मे रिजल्ट का सिलसिला शुरू होने वाला है फिर देखिए कैसे शुरू होता है तुलना करने का सिलसिला की वो कैसे तुमसे ज्यादा नम्बर पा गया तुम क्या करते थे, यहां तक कि घर वाले इसे अपने सम्मान से जोड़ लेते है और बच्चों को यह भी कह देते है तुम तो मेरी नाक कटवाने के लिए ही पैदा हुए हो तुम्हारा कुछ नही हो सकता है यही सब बातें लोगो को निराश करती है वो खुद को नाकामयाब मान लेते है जो नाकामयाब है उसे कामयाब बना सकते है लेकिन जो खुद को मान ही लिया है मुझसे कुछ नही होगा उसे इस स्थिति से बाहर निकालना बड़ा ही कठिन काम है
हताशा से बाहर निकलने के कुछ तरीके है जैसे कि पहले खुद को इतना मजबूत बना लो कि कोई तुम्हारे विश्वास को हिला न पाए आप यह मानिए की आपको आप से बेहतर कोई नही जानता तो आप तब तक नही हारेंगे जब तक खुद नही हार मान लेंगे।आप पहले खुद को विश्वास दिलाइये की आप सही है जब आप बार बार खुद को यह बताएंगे कि I am perfect तब आपके अंदर पॉज़िटिव ऊर्जा का संचार बढ़ेगा खुद पर विश्वास बढ़ेगा खुद को जानने की उत्सुकता बढ़ेगी तब आप धीरे धीरे इतने मजबूत हो जाएंगे कि आपके आत्मविश्वास को कोई हिला नही पाएगा आप दुनिया से अपनी लड़ाई पूरी निडरता से लड़कर सफलता प्राप्त कर लेंगे।।
खुद को हताश होने में काफी हद तक हम खुद जिम्मेदार है और हमसे ज्यादा हमारे आसपास का माहौल ज़िम्मेदार है ऐसा मैं केवल कह नही रहा हूं उसके मेरे पास पर्याप्त कारण भी है। आप पहले अपना बचपन याद करिये जब आप छोटे होते थे आपको हार जीत जैसे चीजो से बेफिक्र थे तब कुछ लोग रात में आपको कुछ ऐसी बकवास बाते बताकर डरा देते थे वो डर हमारे मन मे इतना गहरा प्रभाव छोड़ती थी कि बचपन से किशोर होते होते मन के किसी न किसी कोने में वो रात वाला डर घर कर ही लेता था जो कि अब जाकर पता चला कि अंधेरे से डरने जैसा कुछ भी नही है
फिर आप अपना स्कूल के दिन याद करिये तब लोग आपके मन मे पास फेल और नम्बर ,क्लास में स्थान लाने जैसी चीजों के बारे में तुलना करते है कि तुम कम नम्बर पा रहे हो तुम्हारा कुछ नही हो सकता ,तुम बेकार हो और यह ड्रामा केवल बड़े क्लासो में ही नही छोटे छोटे बच्चों के साथ भी होता है उस समय बच्चे इतने छोटे होते है कि वो इस चीज को मान लेते है वही चीज धीरे धीरे उनके मन मे घर कर लेती है जिससे बाहर आने में उन्हें बहुत समय लगता है कभी कभी तो वो हमेशा के लिए ही मन मे बैठ ही जाती है
अभी देश मे रिजल्ट का सिलसिला शुरू होने वाला है फिर देखिए कैसे शुरू होता है तुलना करने का सिलसिला की वो कैसे तुमसे ज्यादा नम्बर पा गया तुम क्या करते थे, यहां तक कि घर वाले इसे अपने सम्मान से जोड़ लेते है और बच्चों को यह भी कह देते है तुम तो मेरी नाक कटवाने के लिए ही पैदा हुए हो तुम्हारा कुछ नही हो सकता है यही सब बातें लोगो को निराश करती है वो खुद को नाकामयाब मान लेते है जो नाकामयाब है उसे कामयाब बना सकते है लेकिन जो खुद को मान ही लिया है मुझसे कुछ नही होगा उसे इस स्थिति से बाहर निकालना बड़ा ही कठिन काम है
हताशा से बाहर निकलने के कुछ तरीके है जैसे कि पहले खुद को इतना मजबूत बना लो कि कोई तुम्हारे विश्वास को हिला न पाए आप यह मानिए की आपको आप से बेहतर कोई नही जानता तो आप तब तक नही हारेंगे जब तक खुद नही हार मान लेंगे।आप पहले खुद को विश्वास दिलाइये की आप सही है जब आप बार बार खुद को यह बताएंगे कि I am perfect तब आपके अंदर पॉज़िटिव ऊर्जा का संचार बढ़ेगा खुद पर विश्वास बढ़ेगा खुद को जानने की उत्सुकता बढ़ेगी तब आप धीरे धीरे इतने मजबूत हो जाएंगे कि आपके आत्मविश्वास को कोई हिला नही पाएगा आप दुनिया से अपनी लड़ाई पूरी निडरता से लड़कर सफलता प्राप्त कर लेंगे।।
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