क्योकि वो माँ है


मैं आज भी देर से आया था ,घर और मोहल्ले में लगभग सब सो गए थे सुनसान गली में अगर कोई चल रहा था तो वह मैं था और साथ मे कोई थी तो मेरी परछाई,जो कभी साथ चलती तो कभी नही ,ऐसा इसलिए कि गली की हर स्ट्रीट लाइट जल नही रही थी,घर पर आज भी रोज की तरह कोई जाग रहा था तो वो मम्मी थी मेरी, जानता तो था कि वो मेरे इंतज़ार में ही जाग रही है जो कि उनकी उनीदी आंखों से पता चल रहा था,फिर भी मैने पूछा कि मम्मी सो गई होती अभी तक क्यो जाग रही हो,आज फिर मम्मी ने अपनी आंखों की नीद को छुपाते हुए बोली कि नही बेटा वो नीद ही नही आती अब तो इस उम्र में
वैसे घर मे हर कोई होता है लेकिन इंतज़ार अगर किसी को सबसे ज्यादा होता है तो वो माँ को ही होता है

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