चुनावी साल: सत्ता पक्ष से सवाल


चुनाव के साल में देखते देखते चुनाव की तारीख भी आ ही गयी । हर पार्टी के नेता से लेकर कार्यकर्ता तक पूरे जोश में है,हर कोई अपने नेता को भगवान बनाने में तुला है,हर नेता पूरी कोशिश में है कि जनता को कैसे अपने पक्ष ने लाया जाए,उसके लिए उनसे जो भी हो सकता है कर ही रहे है कागज के नाव पानी मे बहाए जा रहे है। तो भइया हम है जनता ,और जनता के नाते हमारा भी कुछ हक और जिम्मेदारियां है ,हमे उसे पूरी ईमानदारी से निभाना पड़ेगा क्योंकि हमें मौका पांच साल में एक ही बार मिलता है,तो आज हम वर्तमान सत्ता पक्ष को वोट करने से पहले क्या देखे
आज हालात ज्यादातर सत्तापक्ष के लोगो का यह है कि वो आज भी या तो विपक्ष को कोस रहे है या समाज को बांटने में लगे है ,जबकि जिम्मेदारी उनकी यह है कि वो इन बातों पर अब चुनाव लड़े की 2014 में उन्होंने क्या वादे किए थे उनमें कितना हासिल हुआ वह जनता को बताए न कि इसमें लगे रहे कि उनका हर काम नेहरू जी ही रोक रहे है
आरोप प्रत्यारोप तो राजनीति में होगा ही बात जायज है अगर अब भी राजनीतिक स्वरूप नही बदला तो कब बदलेगा ,क्या हम इसी में फसे रहेंगे की कांग्रेस ने गलत किया तो bjp भी करेगी या bjp के गलत कामो के बदले कांग्रेस भी गलत करेगी
अब बात यह हो रही है कांग्रेस ने ऐसे काम किये तो मै क्यों नही तो जबाब यह है कि अब पार्टिया विचारधारा को बदले
जनता के रूप में हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने सांसद के कार्यो और वादों का मूल्यांकन करे फिर देखे की इन्होंने जो वादे हमसे किये उनमे कितना हमे मिला ,या की केवल आप का वोट लेकर नेताजी दिल्ली निकल लिए फिर वापस वोट लेने ही आये है,
आशा है कि जनता मूल्यांकन करके ही वोट देगी तभी बदलाव संभव है,अबकी बात हो गयी सत्ता पक्ष से सवाल की ,रही बात विपक्ष की तो उसके लिए दूसरे पोस्ट में बात होगी कि उनसे क्या सवाल किए जाए

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