चुनावी माहौल: कांग्रेस के घोषणा पत्र में क्या कुछ खास


आज देश की दो बड़ी पार्टियों में से एक कांग्रेस का घोषणा पत्र "हम निभाएंगे" के टैग लाइन के साथ जारी हुआ। इस घोषणा पत्र में काफी कुछ व्यवहारिक बाते भी है और जरूरी बातें भी है ।इसे पढ़कर ऐसा महसूस होता है कि राहुल गांधी मजबूरी में या वो समझ गए है कि राजनीति का मुद्दा अब बदलना ही होगा।खैर कारण जो भी हो लेकिन इस घोषणा पत्र में किसानों की बात की गई ,युवाओ की बात की गई,बेरोजगारी की बात की गई,स्वास्थ्य की बात की गई ,और देखे तो जनता का मूलरूप से समस्या इन्ही क्षेत्रो में है तो आइए कुछ प्रमुख मुद्दों पर बात कर ही लिया जाए
पहला जो बात मुझे खास लगी वो यह कि इन्होंने किसान के लिए अलग बजट की बात की है जो कि आज के हताश ,परेशान किसानों के लिए जरूरी भी है। किसानों को जरूरत है कि वो सरकारों के मुद्दों के केंद्र में है और उनपर विशेष काम करने की जरूरत है जिससे किसान न खेती छोड़े और न ही आत्महत्या करे, किसानों के कर्ज न चुका पाने की स्थिति में उनपर आपराधिक केस नही दर्ज होंगे जो कि बहुत ही बेहतरीन कदम है क्योंकि केस दर्ज करने के नाम पर कर्जदार किसानों का बहुत शोषण होता है
दूसरी बात जो बेहद जरूरी है देश के लिए वो शिक्षा का मुद्दा है इन्होंने उस पर जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने का वादा किया है  अगर देश को वाकई अन्य देशों से कंधे से कंधा मिलाना है तो जरूरी है शिक्षा बजट बढ़ाना ही होगा ,शिक्षा के स्वरूप में मूलभूत परिवर्तन के साथ निचले स्तर से ऊपर तक शिक्षा को मजबूत बनाना होगा,हर आदमी चाहे वो गरीब हो या अमीर शिक्षा सबके पहुच में होनी चाहिए
तीसरी बात जो है कि इन्होंने समयबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया करवाने का वादा किया है जो कि आज के समय मे युवा लोगो की प्रमुख समस्या बन गयी है । इस पर बहुत ही ईमानदारी से काम करने की जरूरत है ,वादा करना आसान है लेकिन इसे सही करना थोड़ा मुश्किल है नामुमकिन नही है बस इच्छाशक्ति की जरूरत है
चौथी बात युवा कारोबार के लिए है जो कि बेहतर बात है कि उन्हें खुद को स्थिर होने का समय मिलेगा ,खुद को पूरी तरीके से बिना किसी सरकारी झंझट के रोजगार लगाकर जमाये
पाचवी बात मनरेगा में दिन बढ़ाकर100 से 150 किये गए जो स्वागत योग्य है मनरेगा में सबसे बड़ी जो दिक्कत है वो उसकी मॉनिटरिंग की है अगर योग्य लोगो को मनरेगा रोजगार दे तो जो अनपढ़ और ग्रामीण गरीब है उनके लिए मनरेगा किसी वरदान से कम नही है
    मिनिमम आय पर मुझे लिखने के लिए कुछ है नही अगर उसको बिना किसी दुष्प्रभाव के लागू कर पाते है तो बहुत ही बड़ी बात होगी
        इनके घोषणा पत्र में है तो बहुत कुछ लेकिन फिर वही सवाल की इसकी घोषणा करना तो आसान है लेकिन जमीन पर लाना मुश्किल है नामुमकिन तो कुछ नही है बस इच्छाशक्ति की जरूरत होगी
इसमे आम जनमानस के मूलभूत मुद्दों पर बात की गई है यह बेहतरीन है कि कोई तो जनता के वास्तविक मुद्दों की तरफ मजबूरी वश या जो भी कारण रहा हो लेकिन जनता  ,युवा ,और किसान की बात की

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