चुनावी साल में रोजगार का सवाल
जैसा कि चुनाव की घोषणा हो गयी है और एक अहम सवाल अबकी चुनाव को जरूर प्रभावित करेगा जो है 'रोजगार' का सवाल
जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई तो सभी सवालों में एक सबसे ज्यादा जो लुभाने वाला मुद्दा था वो रोजगार का भी था, जिसका इन लोगो ने भरपूर तरीके से फायदा उठाया, लेकिन वही सवाल अब इनपर भी आ गया है कि 2014 में जिस मुद्दे को इन्होंने भुनाया अब उसका ये क्या जबाब देंगे
अगर आप इकोनॉमिक टाइम्स और NSSO के रिपोर्ट पर ध्यान दे तो पाते है कि बेरोजगारी की पिछले कई सालों में सबसे ज्यादा 2017-18 में है ,जो इस सरकार को मुश्किल में डाल सकती है
वर्तमान में युवा शक्ति जिसका प्रधानमंत्री जी भी बराबर जिक्र करते है कि ये राष्ट्र की शक्ति है वो सबसे ज्यादा परेशान किसी से है तो वह बेरोजगारी ही है, यह माना जा सकता है कि हर किसी को सरकारी नौकरी नही दी जा सकती लेकिन अन्य सेक्टरों में भी नौकरियां बढ़ने के बजाय लगातार घट ही रही है जो इस बार के चुनाव का मुद्दा कही न कही होगा
इस सरकार ने पूरी कोशिश की है कि रोजगार कितना आया या गया इसका आंकड़ा न बताना हो यदि रोजगार बढ़े होते तो जाहिर सी बात है सरकार उसका क्रेडिट जरूर लेती
अब तो आने वाला समय ही बताएगा कि रोजगार का मुद्दा इस चुनाव को कितना प्रभावित करता है । लेकिन सवाल तो अहम है और यह सवाल सभी को सभी पार्टियों से पूछना चाहिए चाहे वह कोई भी हो
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