चुनावी साल: उछलते मुद्दे

चुनाव आते ही एक काम हमारे नेता बड़े ही ईमानदारी से करते है ,वैसे पूरे पांच साल तो ये कोई काम नही करते लेकिन चुनाव आते ही इनका सबसे लोकप्रिय काम होता है अपनी प्यारी और भोली भाली जनता को नए नए जुमले देना।वैसे जुमला सुनकर आप हमें सत्ता पार्टी का दुश्मन समझे उसके पहले मैं बता देना चाहता हूं कि मैं सत्तासीन पार्टी के साथ साथ अन्य सभी पार्टियों और नेताओं की बात कर रहा हूं जो अपने देश मे है
अब हो ऐसा रहा भाई की नेताजी लोग आपका ध्यान इतनी सफाई से आपके वास्तविक मुद्दों से हटा रहे है जितनी सफाई से बिल्ली मलाई साफ करती है ,बिल्ली वाले में कुछ कमी हो सकती है लेकिन इनके में तो शत प्रतिशत आउटपुट दे रहे है
हम तो ठहरे जनता हमारा क्या हम तो पांच साल अपना परेशानी बेरोजगारी,शिक्षा ,स्वास्थ्य और सफाई अन्य भी मुद्दे है के बारे में चीख पुकार करते है लेकिन जैसे ही चुनाव आता है नेताजी जुमला वाली घुट्टी देते है हम फिर किसी न किसी नेता के प्रवक्ता बने हर गली चौराहे पर मिलते है
सत्ता वाली पार्टी का तो पूछो ही मत भाईसाहब जिन मुद्दों को लेकर पांच साल पहले सरकार बनाई उसके बारे में कोई आउटपुट देने के बजाय अबकी बार नए तरीके लाये है कि सबको चौकीदार बनाकर एक रात में बेरोजगारी खत्म कर दिया ,लेकिन ये लोग ये नही बता रहे है कि गंगा सफाई,बेरोजगारी ,स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में क्या किये
अब भी ये सत्तर साल का हिसाब ही बता रहे है ,अब इस बात को लेकर आप हमें कांग्रेसी न समझे क्योकि सवाल सत्ता से ही होता है ,रही बात सत्तर साल की तो पांच साल पहले जनता ने उनसे हिसाब ले लिया अब वक्त है वर्तमान सरकार पांच साल का बायोडाटा दे क्योकि अबकी सत्तर साल के साथ साथ आपका पांच साल ज्यादा लोगो की नजर में रहेगा
आशा है कि सत्ता और विपक्ष जुमला वाली गोली न देकर जनता के वास्तविक मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी और जनता अपने वास्तविक मुद्दे पर वोट करेगी

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