क्या हम केवल वोटर बन कर रह गए है?
चुनाव आते ही हमारे देश की पार्टिया हमें केवल वोटर की तरह क्यों समझती है ! ये पार्टिया देश के नागरिको का जैसे तैसे वोट लेने के लिए ही इस्तेमाल करना चाहती है ! देश की जो ज्यादातर आबादी है उसको हर उम्मीदवार केवल वोटर ही देख रहा है वो यह चाहते है की वोट इनको मिल जाये उससे ज्यादा इन पार्टियों को
किसी चीज से मतलब नहीं है
इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है की हमारे जमीनी मुद्दे भी नेता के मुद्दे बन ही नहीं रहे है देश के किसान की बात कोई कर रहा है। किसान की फसल का उचित दाम कैसे मिलेगा इस पर बात हो रही है। किसान आत्महत्या क्यों कर रहा है इस पर किसी ने आवाज उठाई की हमने किसान के आत्महत्या जैसे गंभीर समस्या पर काम करूँगा और रही बात वर्तमान सरकार की तो ये लोग तो इतने गंभीर समस्या को शायद समस्या समझते ही नहीं क्योकि किसान के लिए क्या किया इस पर केवल विज्ञापन ही छपते है जमीनी हकीकत क्या है इस पर कोई बात ही नहीं कर रहा है। किसान जीवन बीमा से क्या मिला किसान को आखिर जिन कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दी गयी थी उनका ऑडिट हुआ कि उन्होंने किसान से कितना लिया और कितना भुगतान किया
हमारे यहां पार्टियों का एक ही मुद्दा है कि समस्या का हल खोजने के बजाय अस्थाई लॉलीपॉप दो जनता को अपने तरफ खींचो वोट लो फिर पांच साल के लिए भूल जाओ
यहां कोई पार्टी स्थाई हल तो चाहती है नही उसका भी कारण है क्योंकि अगर मुद्दा हल हो गया तो अगली बार कोई नया लॉलीपॉप कहा से लाएंगे इससे बढ़िया है कि समस्या को जीवित रखो और साल दर साल आज वो तो कल दूसरा मजे ले
ध्यान देने वाली बात है अभी जब हमारी समस्या पर बात करने का समय है तो चोर चौकीदार खेल रहे है केवल वो ही नही हमे भी उसी में फसा रखा है हम भी फेसबुक ट्विटर में चौकीदार और चोर खेल रहे है सब कुछ भूलकर यही से उनको पता चलता है जनता के मुद्दे गायब करना कितना आसान आसान है ।आज हमारे मुद्दे गायब कर रहे है अगर हाल यही रहा तो वो दिन दूर नही जब वो हमें भी गायब कर देंगे
केवल लोकतंत्र में वोट करने से चीजे नही बदलेंगी ,बदलेंगी तब जब हम जागरूक होकर आवाज उठाएंगे ,हमारे मुद्दे क्या है वो ये नही बताएंगे वो हम बताएंगे कि समस्या यह है इसका निराकरण क्या है नेताओ के पास ,जब निराकरण सही तभी वोट। कुछ तो बदलना होगा नही तो नेता ऐसे ही हर पांच साल में आएगा मंच से लॉलीपॉप देगा और बाद में कहेगा कि वह तो चुनाव जीतने के लिए जुमला था
आप वोट जरूर करे लेकिन पहले सवाल जरूर करे कि हम अपना पांच साल किसे दे कि अगला पांच साल हम पछताए नही आप पहले महीने दो महीने के मुद्दे में फसे नही आप हर मुद्दे पर बात करे फिर वोट करे
इन पार्टियों का क्या ये तो सालो साल से हमे वोटर ही समझ रही है वो तो हमारा इस्तेमाल ही करना चाहती है लेकिन अब नही ,अब उन्हें और हमे दोनो को बदलना होगा।।
हमारे यहां पार्टियों का एक ही मुद्दा है कि समस्या का हल खोजने के बजाय अस्थाई लॉलीपॉप दो जनता को अपने तरफ खींचो वोट लो फिर पांच साल के लिए भूल जाओ
यहां कोई पार्टी स्थाई हल तो चाहती है नही उसका भी कारण है क्योंकि अगर मुद्दा हल हो गया तो अगली बार कोई नया लॉलीपॉप कहा से लाएंगे इससे बढ़िया है कि समस्या को जीवित रखो और साल दर साल आज वो तो कल दूसरा मजे ले
ध्यान देने वाली बात है अभी जब हमारी समस्या पर बात करने का समय है तो चोर चौकीदार खेल रहे है केवल वो ही नही हमे भी उसी में फसा रखा है हम भी फेसबुक ट्विटर में चौकीदार और चोर खेल रहे है सब कुछ भूलकर यही से उनको पता चलता है जनता के मुद्दे गायब करना कितना आसान आसान है ।आज हमारे मुद्दे गायब कर रहे है अगर हाल यही रहा तो वो दिन दूर नही जब वो हमें भी गायब कर देंगे
केवल लोकतंत्र में वोट करने से चीजे नही बदलेंगी ,बदलेंगी तब जब हम जागरूक होकर आवाज उठाएंगे ,हमारे मुद्दे क्या है वो ये नही बताएंगे वो हम बताएंगे कि समस्या यह है इसका निराकरण क्या है नेताओ के पास ,जब निराकरण सही तभी वोट। कुछ तो बदलना होगा नही तो नेता ऐसे ही हर पांच साल में आएगा मंच से लॉलीपॉप देगा और बाद में कहेगा कि वह तो चुनाव जीतने के लिए जुमला था
आप वोट जरूर करे लेकिन पहले सवाल जरूर करे कि हम अपना पांच साल किसे दे कि अगला पांच साल हम पछताए नही आप पहले महीने दो महीने के मुद्दे में फसे नही आप हर मुद्दे पर बात करे फिर वोट करे
इन पार्टियों का क्या ये तो सालो साल से हमे वोटर ही समझ रही है वो तो हमारा इस्तेमाल ही करना चाहती है लेकिन अब नही ,अब उन्हें और हमे दोनो को बदलना होगा।।

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