भारतीय राजनीति किसान एक विकल्प


सुबह सुबह एक खबर की किसानो का प्रधानमंत्री जी के विरोध में चुनाव लड़ने का एलान काफी अलग खबर है ! इससे लोग एक बात तो सोचेंगे ही की जनता केवल वोट देने के लिए ही नहीं है वह विकल्प भी है
भारतीय राजनीति को ऐसा पेश किया जा रहा है की वर्तमान समय में वर्तमान पार्टी ही सर्वश्रेष्ठ पार्टी है ,और जनता के पास विकल्प का अभाव है ! यह पार्टियों की चाल होती है की खुद के लिए ऐसा माहौल तैयार किया जाये की जनता उनके जाल में फस जाये की उनके सामने कुछ खास लोगो को चुनने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है !अगर आप वर्तमान राजनीति पर गौर करे तो पाते है की जनता के आवाज और मुद्दों को भटका कर कुछ ख़ास पारम्परिक मुद्दे फिर से मुँह उठाए खड़ा है
इसी बीच एक खबर काफी नई और उथल पुथल मचाने वाली भी है की जिन कर्नाटक के किसानो ने 2017 में १०० दिन से अधिक समय तक धरना दिया था वो भी सरकार के नाक के नीचे ,लेकिन उनकी बातो को सुनने कोई भी नहीं आया वो अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुँचाना चाहते थे लेकिन जो प्रधानमंत्री जी भाषणों में किसानो के परम हितैषी होने का दावा करते है उन्होंने इनको नजरअंदाज किया
आज जो खास बात आयी है की वो सब 111 किसान प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का एलान कर दिए है ! इन किसानो का चुनाव लड़ने का कारण प्रधानमंत्री का इनकी बातो को अनसुना करना ही है ! इनकी माँगो पर ध्यान दिया जाये तो हम पाते है की ये लोग जो मांग रहे है उसका जिक्र हर पार्टी अपने राजनितिक मंचो से करती आयी है ! वर्तमान सत्ता पार्टी  ने भी किया लेकिन वह बाते शायद कागजों हुए भाषणों तक ही रह गयी नहीं तो ये किसान खेती के बजाय चुनाव क्यों लड़ने आते !
इस बात से एक बेहतरीन सन्देश तो जायेगा ही राजनीतिक गलियारों में की जनता को अब केवल वोटर ही न मानिये अगर उसके साथ धोखा करोगे तो वो एक विकल्प भी बन सकता है ! अब इससे हासिल क्या होगा वो तो आने वाला कल ही बताएगा लेकिन एक सन्देश जो जनता में जायेगा की जनता केवल वोटर ही नहीं है वह विकल्प भी बन सकती है 

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