स्वच्छता: जरूरत भी और जिम्मेदारी भी
स्वच्छता का सीधा संबंध अपने परिवेश के साफ सफाई से है । अपने परिवेश को साफ सुथरा रखना हर एक नागरिक की जिम्मेदारी है।हम जिस परिवेश में रह रहे है अगर वो परिवेश गंदगी से भरा है तो जाहिर सी बात है कि वो गंदगी हम लोगो ने ही फैलाया होगा ,तो साफ सफाई की जिम्मेदारी भी हमारी है ।
हमे अपने आसपास ऐसे लोग आसानी से मिल जाते है जो गंदगी फैलाते समय तो नही ध्यान देंगे लेकिन बात जब सफाई की आती है तो वो ज्ञान जरूर दे देंगे कि ये काम तो सरकार का है।यह कहने में जरा भी संकोच नही करते ये काम तो सरकार का है लेकिन उनको कौन बताये की गंदगी फैलाने का काम किसने आपको दिया है ।सीधी सी बात है अगर हम अपने आसपास गंदगी फैलाते है तो उससे जो नुकसान होगा वो भी हमारा ही होगा उससे जो भी प्रदूषण रूपी गंदगी निकलेगी वो हमें और आपको ही प्रभावित करेगी
एक नागरिक के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम कम से कम अपने आसपास साफ सुथरा रखे तो देश तो अपने आप साफ हो जाएगा बाकी सरकार भी अपने स्तर से प्रयास कर ही रही और अगर हम उसका साथ देंगे तो वाकई भारत स्वच्छ हो ही जायेगा
सरकार को एक जिम्मेदारी निभानी होगी जो कूड़ा करकट शहरों से निकालकर ये लोग ग्रामीण क्षेत्रो के आसपास फेंकते है वो गलत होता है क्योंकि अगर साफ सुथरा वातावरण का जितना हक शहर को है उतना ही गांव का भी,बेहतर होगा कि सरकार ऐसा कुछ करे जिससे कूड़े का प्रभावी ढंग से निस्तारण हो सके
बाकी रही बात नागरिको की तो पहले से काफी जागरूकता लोगो मे आयी है वो सफाई को लेकर सचेत भी हुए है और हो भी रहे है ।आशा है कि लोग अपना फर्ज निभाएंगे तो देश अवश्य स्वच्छ और सुंदर बनेगा ।।
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