पूर्व सैनिक तेजबहादुर जी का राजनीति में आना
बनारस में चुनाव काफी दमदार होता ही जा रहा है । अभी किसानों द्वारा मोदी जी के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात कही गयी थी उसी के साथ एक और धमाकेदार घोषणा पूर्व जवान तेजबहादुर जी द्वारा चुनाव लड़ने को लेकर की गई है
बात अगर तेजबहादुर को लेकर की जाए तो यह सुखद होगा कि बनारस की जनता इनको संसद भेजे वो इसलिए नही की वो एक जवान रह चुके है ,उसका कारण यह है कि वो आपके बनारस की आवाज संसद में बखूबी बुलन्द करेंगे क्योकि जो इंसान सेना में रहकर उसके द्वारा हुई ज्यादतियों के खिलाफ बिना डरे मुखर हो सकता है वह आपकी और बनारस के लिए भी पूरे दम खम से लड़ेगा । साथ ही साथ मुझे लगता है कि जवानों को भी संसद में प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए और जवानों के हक में एक जवान ही उनकी जरूरतों और परेशानियों के बारे में देश को और संसद को बता सकता है
तेजबहादुर के बारे में अभी तक यह पता चला है कि वो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है इसका एक फायदा यह होगा कि वह अपनी बात संसद में बिना किसी दबाव के रख सकते है । सेना से तो बहुत लोग आए लेकिन वो किसी न किसी पार्टी के होकर रह गए उनको जब बात सेना के लिए बोलने की आती है तो वो अपनी जगह ही पक्की करते रहे जाते है पार्टी में ,तब वो स्वहित पहले देखते है देशहित बाद में
दुसरी बात जो मुझे लग रही है आखिर मोदी जी के विरोध में ही क्यो लोग आ रहे है किसान भी और जवान भी दोनो मोदी के विरोध में क्यो है ,इसका कही न कही कारण है कि जनता को जो स्वप्न दिखाया गया वो पूरे नही किये गए ,जनता कही न कही धोखा खा गई है ,जो किसान और जवान देश की रीढ़ होते है अगर वो नाराज है तो बात तो बड़ी ही होगी फिर
अब बनारस की जनता क्या करती है वो तो बाद में पता चलेगा लेकिन अब देश की बड़ी पार्टिया चाहे वह सत्तासीनBJP हो या कांग्रेस इनको एक बात तो पता चल ही जाएगी कि अब जनता खुद भी इनका विकल्प बन सकती है और यह बात देशहित और जनहित की है
बात अगर तेजबहादुर को लेकर की जाए तो यह सुखद होगा कि बनारस की जनता इनको संसद भेजे वो इसलिए नही की वो एक जवान रह चुके है ,उसका कारण यह है कि वो आपके बनारस की आवाज संसद में बखूबी बुलन्द करेंगे क्योकि जो इंसान सेना में रहकर उसके द्वारा हुई ज्यादतियों के खिलाफ बिना डरे मुखर हो सकता है वह आपकी और बनारस के लिए भी पूरे दम खम से लड़ेगा । साथ ही साथ मुझे लगता है कि जवानों को भी संसद में प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए और जवानों के हक में एक जवान ही उनकी जरूरतों और परेशानियों के बारे में देश को और संसद को बता सकता है
तेजबहादुर के बारे में अभी तक यह पता चला है कि वो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है इसका एक फायदा यह होगा कि वह अपनी बात संसद में बिना किसी दबाव के रख सकते है । सेना से तो बहुत लोग आए लेकिन वो किसी न किसी पार्टी के होकर रह गए उनको जब बात सेना के लिए बोलने की आती है तो वो अपनी जगह ही पक्की करते रहे जाते है पार्टी में ,तब वो स्वहित पहले देखते है देशहित बाद में
दुसरी बात जो मुझे लग रही है आखिर मोदी जी के विरोध में ही क्यो लोग आ रहे है किसान भी और जवान भी दोनो मोदी के विरोध में क्यो है ,इसका कही न कही कारण है कि जनता को जो स्वप्न दिखाया गया वो पूरे नही किये गए ,जनता कही न कही धोखा खा गई है ,जो किसान और जवान देश की रीढ़ होते है अगर वो नाराज है तो बात तो बड़ी ही होगी फिर
अब बनारस की जनता क्या करती है वो तो बाद में पता चलेगा लेकिन अब देश की बड़ी पार्टिया चाहे वह सत्तासीनBJP हो या कांग्रेस इनको एक बात तो पता चल ही जाएगी कि अब जनता खुद भी इनका विकल्प बन सकती है और यह बात देशहित और जनहित की है

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